बरेली का दर्दनाक हादसा: पेड़ के नीचे सोए मजदूर पर कीचड़ भरी ट्रॉली पलटी, दम घुटने से मौत
उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में नगर निगम कर्मचारियों की लापरवाही से एक मजदूर की जान चली गई। यह घटना शुक्रवार, 23 मई को बारादरी क्षेत्र के सतीपुर मोहल्ले में घटी। 45 वर्षीय सुनील कुमार, जो सब्जी बेचकर अपने परिवार का पेट पालते थे, थकान मिटाने के लिए घर के पास एक पेड़ के नीचे आराम कर रहे थे। तभी नगर निगम की ट्रॉली वहां पहुंची और कर्मचारियों ने बिना आसपास देखे ही नाले का कीचड़ उनके ऊपर गिरा दिया। इसके बाद सुनील कीचड़ के नीचे दब गए और दम घुटने से उनकी मौत हो गई।
| प्रतीकात्मक चित्र |
कैसे बढ़ी मुसीबत?
सुनील उस दिन काम से लौटकर घर के बाहर पेड़ की छांव में सुस्ता रहे थे। इसी दौरान नगर निगम की गाड़ी नाले की सफाई के बाद कीचड़ लेकर वहां पहुंची। माना जा रहा है कि कर्मचारियों ने ट्रॉली से कीचड़ उलटने से पहले न तो आसपास का निरीक्षण किया और न ही यह सुनिश्चित किया कि उस स्थान पर कोई व्यक्ति मौजूद तो नहीं है। उनकी इसी लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि सुनील पूरी तरह कीचड़ में दब गए।
परिवार को मिला सदमा
घटना के कुछ देर बाद जब सुनील घर नहीं लौटे, तो उनके पिता गिरवर उन्हें ढूंढते हुए मौके पर पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि कीचड़ के ढेर से सुनील का पैर बाहर निकला हुआ है। स्थानीय लोगों की मदद से गिरवर ने अपने बेटे को कीचड़ से निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सुनील का शरीर बेहद कमजोर हो चुका था, और उन्होंने सांस लेना बंद कर दिया था। परिवार ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
प्रशासन की ढिलाई पर सवाल
इस घटना ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सवाल यह है कि आखिर कर्मचारियों ने कीचड़ उलटने से पहले सावधानी क्यों नहीं बरती? क्या नगर निगम द्वारा ठेकेदारों को सुरक्षा मानकों के पालन का निर्देश नहीं दिया जाता? स्थानीय लोगों का कहना है कि अक्सर नगर निगम के कर्मचारी बिना सतर्कता के काम करते हैं, जिससे ऐसी दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
पुलिस और निगम की प्रतिक्रिया
मामले की जानकारी मिलते ही बारादरी थाने के प्रभारी धनंजय पांडेय ने ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने बताया कि शव का पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। वहीं, नगर निगम के अधिकारियों ने घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच का दावा किया है। उन्होंने कहा कि लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
परिवार की मांग न्याय की
सुनील की मौत ने परिवार को तोड़कर रख दिया है। उनके पिता गिरवर आंसू बहाते हुए कहते हैं, "मेरा बेटा दिनभर मेहनत करके घर लौटा था। अगर निगम वाले थोड़ी सी भी सावधानी बरतते, तो आज वह जिंदा होता।" परिवार ने मृतक के लिए न्याय और मुआवजे की मांग की है। स्थानीय नेता और संगठन भी इस मामले में प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।
समाज के लिए चेतावनी
यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता को दर्शाती है। अक्सर सफाई कर्मचारियों को बिना प्रशिक्षण या सुरक्षा उपकरणों के खतरनाक काम करने के लिए छोड़ दिया जाता है। इसके अलावा, ठेकेदारी प्रणाली में जवाबदेही का अभाव होता है, जिससे ऐसे हादसे बार-बार दोहराए जाते हैं। सुनील की मौत हमें यह याद दिलाती है कि सार्वजनिक कार्यों में सुरक्षा और मानवीय संवेदनशीलता को प्राथमिकता देना कितना जरूरी है।
आगे का रास्ता
इस घटना के बाद नगर निगम को अपने कर्मचारियों और ठेकेदारों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए। सफाई कार्यों के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करना होगा। साथ ही, ऐसे मामलों में त्वरित मुआवजा और कानूनी कार्रवाई की व्यवस्था करनी होगी, ताकि भविष्य में कोई और सुनील बेमौत न मरे।

Very sad 😡
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