पचमढ़ी: मध्य प्रदेश की 'गुप्त राजधानी' जहां आज भी खड़े हैं वीवीआईपी बंगले!
भोपाल को तो सब जानते हैं, मध्य प्रदेश की राजधानी के तौर पर। लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रदेश की एक और शहर में राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मंत्रियों के लिए विशाल बंगले और एक भव्य राजभवन मौजूद है? यह शहर है प्रदेश का इकलौता हिल स्टेशन, पचमढ़ी। जी हाँ, भोपाल के अलावा पचमढ़ी में भी सत्ता के प्रतीक ये विशेष आवास स्थित हैं।
भोपाल नहीं, पचमढ़ी की बात:
जब मध्य प्रदेश की राजधानी का नाम आता है, तो भोपाल का चेहरा आँखों के सामने आ जाता है। यहाँ राजभवन की भव्यता हो या मुख्यमंत्री और मंत्रियों के विशाल बंगलों का दबदबा, सब कुछ राजधानी के रूप में विकसित हुआ है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भोपाल से दूर, सतपुड़ा की पहाड़ियों पर बसे पचमढ़ी में भी राज्यपाल का एक विशाल राजभवन और मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों के लिए आलीशान बंगले मौजूद हैं? ये सिर्फ इमारतें नहीं, बल्कि प्रदेश के इतिहास के एक दिलचस्प अध्याय की गवाही देते हैं।
ग्रीष्मकालीन राजधानी का खोया हुआ गौरव:
इसकी वजह है पचमढ़ी का वह ऐतिहासिक दर्जा जो उसे मध्य प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाता था। अंग्रेजों के जमाने से लेकर आजाद भारत में साल 1967 तक, जब भोपाल में भीषण गर्मी पड़ती, तो प्रदेश की सरकारी मशीनरी पूरी तरह पचमढ़ी स्थानांतरित हो जाया करती थी। राज्यपाल यहीं रहते, मुख्यमंत्री और मंत्री यहीं काम करते, और सरकारी कामकाज की बैठकें भी यहीं होती थीं। यही वजह थी कि यहाँ राज्यपाल के लिए एक विशाल राजभवन और मंत्रियों के लिए बंगलों का निर्माण कराया गया।
हालाँकि, 1967 की गर्मियों के बाद पचमढ़ी को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की यह परंपरा समाप्त कर दी गई। इसके साथ ही इन भव्य इमारतों का भी राजनीतिक महत्व कम हो गया और राजभवन को बंद कर दिया गया था। कई दशकों तक ये भवन उपेक्षा की नींद सोते रहे।
पुनर्जीवन और वर्तमान स्थिति:
समय बदला। कुछ साल पहले ही पचमढ़ी के इस ऐतिहासिक राजभवन को दोबारा जीवंत किया गया और इसे आम जनता के लिए खोल दिया गया। हालाँकि, इसके साथ ही इन भवनों के मूल उद्देश्य – वीवीआईपी आवास और बैठक स्थल के रूप में उपयोग – को भी पुनर्जीवित किया गया है। इसी कड़ी में हाल ही में, 3 जून को, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में यहाँ मंत्रिपरिषद की बैठक भी आयोजित की गई। यह बैठक सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक प्रतीकात्मकता भी रखती है।
राजा भभूत सिंह की विरासत को श्रद्धांजलि:
इस बैठक का एक खास उद्देश्य गोंड शासक राजा भभूत सिंह के ऐतिहासिक योगदान को याद करना और उन्हें श्रद्धांजलि देना भी था। राजा भभूत सिंह पचमढ़ी क्षेत्र से जुड़े एक प्रतापी शासक थे, जो जनजातीय समाज के गौरव और शौर्य के प्रतीक माने जाते हैं। मंत्रिपरिषद की बैठक इसी धरती पर आयोजित करके उनकी विरासत को सम्मान देने का प्रयास किया गया।
राजभवन: भव्यता का प्रतीक:
पचमढ़ी का राजभवन परिसर अपने आप में अद्भुत है। यह करीब 23 एकड़ (22.84 एकड़) के विशाल हरे-भरे क्षेत्र में फैला हुआ है, जो अंग्रेजों के जमाने का बनवाया हुआ है। इसकी विशेषताएँ देखते ही बनती हैं:
- विशाल कॉन्फ्रेंस रूम: जहाँ पहले शासन की बैठकें होती थीं और अब भी महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की जा सकती हैं।
- भव्य डायनिंग हॉल: औपचारिक भोजों और समारोहों के लिए उपयुक्त।
- घुड़साल और हाथीशाला: राजसी ठाठ के प्रतीक, जो इसके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं।
- वीवीपी गेस्ट रूम: राज्य के मेहमानों और उच्च अधिकारियों के ठहरने के लिए सुसज्जित कमरे।
मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बंगले:
राजभवन के अलावा, पचमढ़ी में मुख्यमंत्री के लिए एक विशेष बंगला और अन्य मंत्रियों के लिए भी अलग-अलग बंगले बने हुए हैं। ये बंगले भी पर्याप्त विशाल और सुविधायुक्त हैं, जो उन दिनों की याद दिलाते हैं जब यहाँ पूरी मंत्रिपरिषद गर्मियाँ बिताया करती थी।
निष्कर्ष: इतिहास और वर्तमान का अनूठा संगम:
पचमढ़ी का यह वीवीआईपी आवास परिसर सिर्फ इमारतों का समूह नहीं है। यह मध्य प्रदेश के राजनीतिक इतिहास का एक जीवंत अध्याय है, जो ग्रीष्मकालीन राजधानी के खोए हुए दौर की कहानी कहता है। हालाँकि अब यह औपचारिक रूप से राजधानी नहीं रहा, लेकिन भव्य राजभवन और मंत्री बंगलों की मौजूदगी इसे प्रदेश की एक 'गुप्त' या 'प्रतीकात्मक' राजधानी का दर्जा देती है। हाल की कैबिनेट बैठक और राजा भभूत सिंह को याद करने का प्रयास इस ऐतिहासिक धरोहर को पुनर्जीवित करने और इसे वर्तमान से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक कदम है। पचमढ़ी की यह विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रदेश के गौरवशाली अतीत की झलक दिखाती रहेगी।
#Pachmarhi #MPRajBhawan #SummerCapital #MadhyaPradeshHistory #CabinetMeeting2025

No comments: