जबलपुर में किराए के मकान से चल रहा था नकली नोटों का धंधा
18 लाख के जाली नोट खपाने वाले गिरोह का पर्दाफाश
जबलपुर पुलिस ने एक बड़े नकली करेंसी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। करीब 18 लाख रुपए के जाली नोट छापकर बाजार में खपाने की साजिश रचने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड ऋतुराज विश्वकर्मा को गिरफ्तार किया गया है। ऋतुराज ने किराए के मकान में ही नकली नोट छापने की फैक्ट्री चला रखी थी।
कैसे पकड़ा गया गिरोह?
हनुमानताल पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि रवि दाहिया नाम का एक व्यक्ति जाली नोटों की तस्करी कर रहा है। 16 जून को पुलिस ने रवि को मदार टेकरी के पास से गिरफ्तार किया। उसके पास से 2 लाख 94 हजार रुपए के 500 के नकली नोट बरामद हुए।
पूछताछ में रवि ने बताया कि ये नोट उसे ऋतुराज विश्वकर्मा ने दिए थे। दोनों के बीच डील थी कि 1 लाख रुपए के नकली नोट के बदले रवि ऋतुराज को 30 हजार रुपए असली नोट में देगा। इस सूचना के बाद पुलिस ने ऋतुराज के घर पर छापा मारा, जहां से 1 लाख 94 हजार रुपए के नकली नोट, लैपटॉप, प्रिंटर, कटर और A4 साइज के पेपर बरामद किए गए।
कैसे काम करता था गिरोह?
ऋतुराज पिछले एक महीने से नकली नोट छापने और बेचने का धंधा कर रहा था। उसने अपने गिरोह के साथ मिलकर मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में नकली नोट खपाने का नेटवर्क तैयार किया था। उसकी योजना थी कि वह प्रदेश के हर जिले में अपने लोगों को बैठाएगा, जो जाली नोटों को असली में बदलने का काम करेंगे।
ऋतुराज का तरीका यह था कि वह 3 लाख रुपए के असली नोट के बदले 12 लाख रुपए के नकली नोट देता था। इस तरह, उसे भारी मुनाफा होता था। पुलिस ने अब तक इस मामले में 7 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी राकेश तिवारी अभी भी फरार है।
ग्रामीण और आदिवासी इलाकों को बनाया निशाना
गिरोह ने जानबूझकर जबलपुर और आसपास के ग्रामीण तथा आदिवासी बहुल इलाकों को चुना, क्योंकि वहां के लोग कम पढ़े-लिखे होते हैं और उन्हें नकली नोटों की पहचान करना मुश्किल लगता है। ऋतुराज ने रेलवे स्टेशन पर धीरज नाम के व्यक्ति से मुलाकात की थी, जिसके जरिए उसने गौरव और राकेश को इस काम में शामिल किया।
दिन में नौकरी, रात में नकली नोट बनाने का धंधा
ऋतुराज के परिवार में उसकी पत्नी और एक बेटा है। वह अपने परिवार को यही बताता था कि वह रोजाना प्राइवेट जॉब पर जाता है, लेकिन असल में वह नकली नोट छापने का काम करता था। रात में, जब उसका परिवार सो जाता, तो वह एक कमरे में जाली नोट तैयार करता था।
उसने नकली नोट बनाने के लिए ऑनलाइन व्हाइट पेपर मंगाए थे और 500 के नोटों की डिजाइन तैयार करने के लिए महंगे रंगों का इस्तेमाल किया। वह लैपटॉप पर असली नोटों जैसी डिजाइन बनाता, फिर प्रिंटर से दोनों तरफ नोट छापता। असली नोटों में चांदी की पट्टी होती है, जिसकी नकल करने के लिए वह सिल्वर कलर से लाइन खींचता था।
नकली नोटों में क्या थी खामी?
हालांकि ऋतुराज के नकली नोट देखने में असली जैसे लगते थे, लेकिन कुछ खामियां थीं:
- नकली नोट का पेपर असली की तुलना में थोड़ा मोटा था।
- अगर नोटों की गड्डी को गिना जाए, तो वे आसानी से नहीं खिसकते थे, जबकि असली नोट आसानी से फिसल जाते हैं।
छत्तीसगढ़ में छिपे हैं कुछ साथी
पुलिस की जांच में पता चला है कि ऋतुराज के कुछ साथी छत्तीसगढ़ में छिपे हुए हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। अब तक कुल 18 लाख रुपए से ज्यादा के नकली नोट बरामद किए जा चुके हैं।
निष्कर्ष
जबलपुर पुलिस ने इस बड़े नकली नोट रैकेट को उजागर करके एक बड़ा ऑपरेशन किया है। ऋतुराज और उसके साथियों ने ग्रामीण इलाकों में लोगों को धोखा देने की योजना बनाई थी, लेकिन पुलिस ने समय रहते इस गिरोह को पकड़ लिया। अब पुलिस की नजर फरार आरोपी राकेश तिवारी पर है, जिसे जल्द ही गिरफ्तार किए जाने की उम्मीद है।


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