कांप उठेगी रूह: सरकारी अस्पताल के बाथरूम में पैदा हुई नवजात का शव कुत्ते ने नोचा!

महू का सनसनीखेज मामला: अस्पताल में नवजात शिशु की त्रासदी और गंभीर सवाल

महू (इंदौर), मध्य प्रदेश। शनिवार की सुबह महू तहसील के सबसे बड़े शासकीय अस्पताल की शांति एक दिल दहला देने वाले दृश्य ने तोड़ दी। अस्पताल परिसर में एक कुत्ता घूमता दिखा, जिसके मुंह में एक नवजात शिशु के शव का एक हिस्सा दबा हुआ था। यह चौंकाने वाली घटना न केवल अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है, बल्कि मानवीय संवेदनहीनता और सिस्टम की विफलता की कहानी बयां करती है।

   क्या हुआ उस काली रात?

घटना की जानकारी अस्पताल प्रभारी हंसराज वर्मा और स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक पेश है:

1.  अनचाहे गर्भ का दर्द: शुक्रवार की देर रात करीब 2:30 बजे, अस्पताल में एक नाबालिग लड़का और लड़की पहुंचे। लड़की ने ड्यूटी पर मौजूद नर्स रेखा सोनी को पेट दर्द की शिकायत बताई। नर्स ने उसे लेबर रूम (प्रसव कक्ष) जाने को कहा।
2.  बाथरूम में जन्म और भागना: लेबर रूम जाते समय रास्ते में पड़ने वाले कॉमन बाथरूम में लड़की चली गई। यहीं पर, उसने एक बच्ची को जन्म दिया। इसके बाद, दोनों किशोर वहां से भाग गए।
3.  सन्नाटे में एक त्रासदी: अस्पताल के अनुसार, रात भर उस बाथरूम के आसपास से गुजरने वाले किसी भी व्यक्ति ने नवजात के रोने की आवाज नहीं सुनी। इससे आशंका जताई जा रही है कि बच्ची या तो मृत पैदा हुई होगी या बहुत कमजोर थी।
4.  कुत्ते का भयावह दृश्य: सुबह लगभग 5:15 बजे का समय था। तभी लोगों की नजर अस्पताल परिसर में घूम रहे एक कुत्ते पर पड़ी। हैरानी और भय के साथ उन्होंने देखा कि कुत्ते के जबड़े में नवजात बच्ची के शव का एक हिस्सा दबा हुआ था।
5.  शव की दयनीय हालत: रिपोर्ट्स के अनुसार, शव बुरी तरह क्षत-विक्षत था। कुत्ता शिशु के फेफड़े और शरीर के अन्य हिस्सों को खा चुका था। आंतें बाहर निकली हुई थीं और सिर भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त था।

   अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप और जांच की कार्रवाई

इस भयावह घटना ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए हैं:
  •  सुरक्षा व्यवस्था ध्वस्त: सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक कुत्ता अस्पताल के अंदरूनी हिस्से तक कैसे पहुंच गया? यह अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की पूर्ण विफलता को दर्शाता है। प्रभारी वर्मा ने स्वीकार किया कि अस्पताल के गार्ड को हटाने के निर्देश आउटसोर्स कंपनी ने पहले ही दे दिए थे, जिससे रात में सुरक्षा ढीली थी।
  •  स्टाफ की लापरवाही? ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और नर्स कितने सजग थे? क्या प्रसूति की शिकायत लेकर आई नाबालिग लड़की पर उचित निगरानी नहीं रखी जानी चाहिए थी? उसे बाथरूम में अकेले जाने दिया गया, जहां उसने प्रसव किया। क्या कोई अनुवर्ती कार्रवाई (फॉलो-अप) हुई? ड्यूटी डॉक्टर को नोटिस भेजकर जवाब मांगा जा रहा है।
  •  सीसीटीवी और तथ्यों को छिपाने के आरोप: मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज और अन्य तथ्यों को छिपाने की कोशिश कर रहा है। यदि सच है, तो यह गंभीर अपराध होगा।
  •  पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार: नवजात के शव का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों की टीम द्वारा किया गया। प्रारंभिक रिपोर्ट में पाया गया कि डिलीवरी प्रीमैच्योर (समय से पहले) हुई थी और बच्ची बेहद कमजोर थी। यह स्पष्ट नहीं है कि मौत जन्म के समय हुई या बाद में। अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है, जो मौत का सटीक कारण बताएगी।

   प्रशासन हुआ सक्रिय, जांच शुरू

घटना की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई शुरू हो गई है:

 स्वास्थ्य विभाग की हलचल: स्वास्थ्य विभाग के रीजनल डायरेक्टर शाजी जोसेफ ने तुरंत मामले का संज्ञान लिया। उन्होंने घटना की जांच के लिए चिकित्सकों की एक विशेष जांच टीम अस्पताल भेजी है। टीम की रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार है
  •  पुलिस ने दर्ज की रिपोर्ट: घटना की सूचना मिलते ही पुलिस को बुलाया गया और मामला दर्ज किया गया। पुलिस घटनास्थल का मुआयना कर चुकी है और जांच में जुटी हुई है। उस नाबालिग जोड़े की तलाश भी जारी है, जो घटना के बाद फरार हो गए।

   किशोर माता-पिता की विवशता: एक और पीड़ादायक पहलू

इस पूरी त्रासदी में उस नाबालिग लड़की और उसके साथी की स्थिति भी विचारणीय है। सामाजिक कलंक, परिवार के भय या आर्थिक तंगी के कारण वे अस्पताल से भागे होंगे। उनकी मजबूरी ने एक जानलेवा स्थिति पैदा कर दी। यह घटना किशोरावस्था में यौन शिक्षा, गर्भनिरोधक उपायों की जानकारी और ऐसी विवश परिस्थितियों में मदद के सुरक्षित चैनलों की गंभीर कमी की ओर भी इशारा करती है।

   आगे की राह: सवाल जवाब से ज्यादा जरूरी

महू की इस दर्दनाक घटना ने सिर्फ एक नवजात शिशु की जान नहीं ली, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के घावों को फिर से हरा कर दिया है:
  •  क्या सरकारी अस्पतालों में मूलभूत सुरक्षा और सफाई मानक सुनिश्चित हैं?
  •  क्या स्टाफ को पर्याप्त प्रशिक्षण दिया जाता है और क्या वे अपनी जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक हैं?
  •  क्या आउटसोर्स्ड सुरक्षा और सफाई कर्मचारियों की जवाबदेही तय है?
  •  ऐसे मामलों में पारदर्शिता क्यों सुनिश्चित नहीं हो पाती?
ये सवाल सिर्फ महू के इस एक अस्पताल तक सीमित नहीं हैं। ये देश भर के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र से जुड़े सिस्टमैटिक खामियों की ओर इशारा करते हैं। एक निरीह नवजात शिशु के साथ जो हुआ, वह न सिर्फ एक अपराध है, बल्कि हम सभी के मानवीय विवेक पर एक कलंक भी है। जब तक जिम्मेदारों को कड़ी सजा नहीं मिलती और सिस्टम में ठोस सुधार नहीं होते, तब तक ऐसी त्रासदियों को रोकना मुश्किल होगा। नवजात की आत्मा की शांति की कामना के साथ, यह उम्मीद की जानी चाहिए कि यह घटना सुधार की दिशा में एक कड़ी साबित हो।

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