कोर्ट ने विकास दिव्यकीर्ति पर सख्त रुख अपनाया, विवाद की वजह है ये वीडियो
कोर्ट ने विकास दिव्यकीर्ति पर सख्त रुख अपनाया, न्यायपालिका के अपमान को लेकर भड़का मामला
Drishti IAS के संस्थापक और मशहूर शिक्षक विकास दिव्यकीर्ति इन दिनों एक विवादित वीडियो की वजह से चर्चा में हैं। राजस्थान की एक अदालत ने उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करते हुए कड़ी टिप्पणी की है। अदालत का कहना है कि दिव्यकीर्ति ने न्यायपालिका के खिलाफ जानबूझकर अपमानजनक और व्यंग्यात्मक भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे न्यायालयों की गरिमा को ठेस पहुंची है।
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| विकास दिव्यकीर्ति |
क्या है मामला
इस मामले की शुरुआत एक YouTube वीडियो से हुई, जिसका शीर्षक था – "IAS vs Judge: कौन ज्यादा ताकतवर है? Best Guidance by Vikas Divyakirti Sir"। इस वीडियो में दिव्यकीर्ति ने आईएएस अधिकारियों और न्यायाधीशों की तुलना करते हुए कुछ ऐसी टिप्पणियां कीं, जिन्हें न्यायपालिका के प्रति अपमानजनक माना गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस वीडियो से न्यायिक व्यवस्था पर जनता का भरोसा कमजोर हो सकता है।
कोर्ट का आदेश
अजमेर कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार हां, लेकिन इसकी आड़ में न्यायपालिका का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि वीडियो में इस्तेमाल भाषा न्यायिक संस्थानों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली थी। साथ ही, अदालत ने यह भी नोट किया कि अगर दिव्यकीर्ति की मंशा साफ होती, तो वह माफी मांग सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
विकास दिव्यकीर्ति की सफाई
विकास दिव्यकीर्ति ने अपनी ओर से सफाई देते हुए कहा कि उनका उस यूट्यूब चैनल से कोई लेना-देना नहीं है, जिसने यह वीडियो अपलोड किया। उनका दावा है कि यह कंटेंट बिना उनकी मंजूरी के एडिट करके सार्वजनिक किया गया। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि वीडियो में किसी खास व्यक्ति या समूह को टारगेट नहीं किया गया था, बल्कि यह एक सामान्य चर्चा थी।
दलीलों को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा
लेकिन कोर्ट ने उनकी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि एक शिक्षक और कोचिंग संस्थान के निदेशक होने के नाते उन्हें पता होना चाहिए था कि उनके भाषण का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि अब तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे पता चले कि दिव्यकीर्ति ने वीडियो हटाने के लिए कोई कदम उठाया हो।
मामले की अगली सुनवाई
अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होनी है, जिसमें दिव्यकीर्ति को कोर्ट में पेश होना अनिवार्य होगा। अगर उन पर आरोप साबित होते हैं, तो उन्हें जुर्माना या जेल की सजा भी हो सकती है। सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। कुछ लोग अदालत के फैसले का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ का मानना है कि यह अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है।
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यह मामला एक बार फिर उस पुरानी बहस को जन्म दे रहा है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थानों की गरिमा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। जहां एक ओर न्यायपालिका की प्रतिष्ठा बनाए रखना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर बिना डर के अपनी बात रखने का अधिकार भी महत्वपूर्ण है। आने वाले दिनों में इस केस की सुनवाई से कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं।

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