गरीबों के मसीहा: पद्मश्री डॉ. एमसी डाबर का निधन,
गरीबों के मसीहा: पद्मश्री डॉ. एमसी डाबर का निधन, जबलपुर शोक में डूबा
20 रुपए में बचाते थे जिंदगियां, आज सुबह हमेशा के लिए चले गए
जबलपुर, मध्य प्रदेश: चिकित्सा जगत का एक दैदीप्यमान सितारा आज सुबह हमेशा के लिए बुझ गया। पद्मश्री डॉ. एमसी डाबर, जिन्हें 'गरीबों का मसीहा' कहा जाता था, का आज सुबह 4 बजे निधन हो गया। वह 82 वर्ष के थे और अपने जीवन के आखिरी दिनों तक गरीबों व जरूरतमंदों का मुफ्त व सस्ती दरों पर इलाज करते रहे। उनके निधन की खबर सुनते ही जबलपुर शहर शोक की लहर में डूब गया।
सिर्फ 20 रुपए में इलाज करने वाले डॉक्टर
डॉ. डाबर ने अपने करियर की शुरुआत 1972 में की थी। उस समय उनकी फीस मात्र 2 रुपए थी। समय बदला, महंगाई बढ़ी, लेकिन उनकी फीस कभी भी 20 रुपए से ज्यादा नहीं हुई। उनका मानना था कि "इलाज इंसानियत की सेवा है, व्यापार नहीं।" इसी सिद्धांत को जीवन भर निभाते हुए उन्होंने लाखों गरीबों का इलाज किया और उन्हें नया जीवन दिया।
पद्मश्री सम्मान से नवाजे गए थे डॉ. डाबर
2014 में भारत सरकार ने उनके अतुल्य योगदान को देखते हुए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था। उनके मरीजों का कहना था कि "डॉक्टर साहब सिर्फ दवा नहीं देते थे, बल्कि मरीजों को जीने का हौसला भी देते थे।" उनकी सरलता और मरीजों के प्रति स्नेह ने उन्हें जबलपुर का सबसे प्यारा डॉक्टर बना दिया था।
"डॉक्टर नहीं, एक संत थे वह"
उनके एक मरीज रामकिशोर यादव ने बताया, "मैं 30 साल से उनका मरीज हूं। वह सिर्फ 20 रुपए लेते थे, लेकिन इतना प्यार देते थे कि लगता था जैसे भगवान ने दर्द हरने के लिए उन्हें भेजा है।"
एक अन्य मरीज शकुंतला देवी ने आंसू भरी आवाज में कहा, "जब डॉक्टर साहब पट्टी बांधते थे, तो ऐसे लगता था जैसे मां का हाथ सिर पर फिर रहा हो।"
आज शाम 4 बजे होगा अंतिम संस्कार
डॉ. डाबर के निधन के बाद उनके परिवार और शहरवासियों ने उनके अंतिम दर्शन किए। उनका अंतिम संस्कार आज शाम 4 बजे गुप्तेश्वर मुक्तिधाम में किया गया। जबलपुर के सैकड़ों लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं।
सोशल मीडिया पर डॉ. डाबर को श्रद्धांजलि
उनके निधन की खबर सुनते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें याद करते हुए संदेश लिखे। कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए कि कैसे डॉ. डाबर ने उनकी जिंदगी बचाई थी।
- "एक युग का अंत हो गया। ऐसे डॉक्टर अब शायद ही कहीं मिलें।"
- "वह सच्चे अर्थों में महात्मा गांधी के सिद्धांतों पर चलने वाले डॉक्टर थे।"
- "जबलपुर ने अपना सबसे बड़ा हीरो खो दिया।"
डॉ. डाबर की विरासत
डॉ. डाबर ने न सिर्फ गरीबों का इलाज किया, बल्कि समाज के लिए एक मिसाल कायम की। उनका जीवन यह सिखाता है कि "पैसा कमाना जिंदगी का मकसद नहीं, बल्कि इंसानियत की सेवा करना है।"
आज उनके जाने से जबलपुर का हर वह गरीब अनाथ हो गया है, जिसका इलाज करने के लिए कोई 20 रुपए में मसीहा मिलता था। डॉ. डाबर शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी शिक्षाएं और प्रेरणा हमेशा जिंदा रहेगी।
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(रिपोर्ट: अमित कुमार, आजाद आवाज जबलपुर)

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