"आई एम सॉरी पापा!" – दहेज के लालच में फंसकर 27 साल की रिधान्या ने की आत्महत्या
"आई एम सॉरी पापा!" – दहेज के लालच में फंसकर 27 साल की रिधान्या ने की आत्महत्या
दहेज की बलि चढ़ी एक बेटी की दर्दनाक कहानी
तमिलनाडु के तिरुपुर में एक ऐसी घटना ने समाज को हिलाकर रख दिया है, जहाँ दहेज के लालच में एक युवती को अपनी जान गँवानी पड़ी। 27 वर्षीय रिधान्या ने शनिवार को आत्महत्या कर ली, जबकि उसके पिता ने शादी में 300 सोने के सिक्के और 70 लाख रुपये की वॉल्वो कार देने के बावजूद उसके ससुराल वालों की मांगें ख़त्म नहीं हुईं।
क्या हुआ था?
- रिधान्या की शादी अप्रैल 2024 में कविन कुमार से हुई थी।
- दहेज में 500 सोने के सिक्के और एक लग्ज़री कार का वादा किया गया था, लेकिन शादी के समय केवल 300 सिक्के और कार दी गई।
- शादी के बाद से ही ससुराल वालों ने बाकी 200 सोने के सिक्कों और अतिरिक्त धन की मांग शुरू कर दी।
- रिधान्या को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी जाने लगी।
"मैं और नहीं जी सकती..." – आखिरी वक्त में पिता को भेजे मैसेज
मौत से पहले रिधान्या ने अपने पिता को 7 व्हाट्सऐप वॉयस मैसेज भेजे, जिनमें उसने अपना दर्द बयां किया:
"पापा, मुझे यह ज़िंदगी पसंद नहीं... मैं और नहीं जी सकती। आप और मम्मी ही मेरी दुनिया थे। माफ़ करना, मैं जा रही हूँ..."
उसने बताया कि उसका पति और सास-ससुर रोज़ाना उसे प्रताड़ित करते थे, और उस पर अधिक दहेज लाने का दबाव डाला जाता था।
पिता का दर्द: "मैंने कहा था एडजस्ट करो..."
रिधान्या के पिता अन्नादुरई ने बताया कि शादी के केवल 15 दिन बाद ही वह रोती हुई घर लौट आई थी। उन्होंने कहा:
"मैंने समझाया कि थोड़ा एडजस्ट करो, लेकिन मुझे नहीं पता था कि हालात इतने ख़राब हैं..."
उन्होंने यह भी बताया कि ससुराल वालों ने 100 करोड़ रुपये की मांग की थी, क्योंकि उनके अनुसार "दूसरे दूल्हों को बिजनेस शुरू करने के लिए इतना ही मिलता है।"
कार में कीटनाशक खाकर की आत्महत्या
- रिधान्या ने शनिवार को कहा कि वह मंदिर जा रही है, लेकिन वह कभी लौटकर नहीं आई।
- कुछ घंटों बाद पुलिस को एक कार में बेहोश रिधान्या मिली, जिसके मुंह से झाग निकल रहा था।
- उसने कीटनाशक की गोलियाँ खा ली थीं।
- अस्पताल ले जाने के बाद उसकी मौत हो गई।
गिरफ्तार हुए पति और ससुराल वाले
पुलिस ने कविन कुमार (पति) और उसके माता-पिता ईश्वरमूर्ति व चित्रादेवी को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप लगाए गए हैं।
समाज से गुहार: "कोई और बेटी ऐसी मौत न मरे"
अन्नादुरई ने अधिकारियों से अपील की है कि दहेज के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि किसी और परिवार को ऐसा दर्द न झेलना पड़े।
निष्कर्ष: दहेज एक सामाजिक अभिशाप
रिधान्या की मौत ने एक बार फिर साबित किया है कि दहेज प्रथा कितनी घातक हो सकती है। आज भी समाज में लड़कियों को वस्तु की तरह देखा जाता है, जिनकी कीमत सोने और गाड़ियों से तौली जाती है।
क्या हम इस अमानवीय प्रथा को खत्म करने के लिए तैयार हैं?
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