MP कांग्रेस में जिला अध्यक्षों की सूची पर बवाल, कई जिलों में विरोध, इस्तीफों का दौर

 MP कांग्रेस में जिला अध्यक्षों की सूची पर बवाल, कई जिलों में विरोध, इस्तीफों का दौर 

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस द्वारा जारी की गई जिला अध्यक्षों की सूची को लेकर पार्टी के भीतर ही विवाद खड़ा हो गया है। शनिवार को जारी इस सूची के बाद से ही प्रदेश के कई जिलों में विरोध के स्वर सुनाई देने लगे हैं। हालात यह हैं कि राजधानी भोपाल से लेकर उज्जैन, बुरहानपुर और अन्य जिलों में कांग्रेसी नाराज नजर आ रहे हैं। कुछ जगहों पर तो इस्तीफा देने का दौर भी शुरू हो गया है।  

MP Congress District President List 2025
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   भोपाल में पूर्व अध्यक्ष मोनू सक्सेना नाराज

भोपाल में प्रवीण सक्सेना को दूसरी बार जिला अध्यक्ष बनाए जाने पर पूर्व अध्यक्ष मोनू सक्सेना ने नाराजगी जताई है। मोनू सक्सेना ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, "राहुल गांधी ने मांगा था संगठन सृजन, भोपाल में हुआ विसर्जन..." बता दें कि मोनू सक्सेना ने भी जिला अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी की थी।  

   हेमंत पाटिल ने दिया इस्तीफा  

इस सूची के जारी होने के बाद इस्तीफा देने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। भोपाल के जिला प्रवक्ता और राजीव गांधी पंचायत प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष हेमंत पाटिल ने इस्तीफा दे दिया है।  

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   उज्जैन, सतना और बुरहानपुर में विरोध  

  • उज्जैन ग्रामीण में महेश परमार को जिला अध्यक्ष बनाए जाने का विरोध हो रहा है।  
  • सतना में सिद्धार्थ कुशवाहा की नियुक्ति पर असंतोष है।  
  • बुरहानपुर में जिला अध्यक्षों के ऐलान के बाद अरुण यादव के समर्थकों ने गुप्त बैठक की है।  
  • अल्पसंख्यक बहुल जिलों में मुस्लिम शहर अध्यक्ष न बनाए जाने पर भी विरोध देखा जा रहा है।  

   21 जिलों में पुराने अध्यक्षों को बरकरार रखा गया  

कांग्रेस ने 21 जिलों में पिछले अध्यक्षों को ही बरकरार रखा है। सूची में 6 विधायक, 8 पूर्व विधायक, 4 महिलाएं, 10 अनुसूचित जनजाति (ST), 8 अनुसूचित जाति (SC), 12 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और 3 अल्पसंख्यक वर्ग के नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि, विधायकों और पूर्व विधायकों को जिम्मेदारी दिए जाने पर ज्यादा विरोध हो रहा है।  

   कांग्रेस के लिए चुनौती बना आंतरिक विवाद

कांग्रेस की इस नई सूची ने पार्टी के भीतर गुटबाजी और असंतोष को बढ़ा दिया है। अगर जल्द ही इस मुद्दे का समाधान नहीं निकाला गया, तो यह 2024 के चुनावों से पहले पार्टी की एकता के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

   निष्कर्ष  

कांग्रेस की इस नई सूची ने पार्टी के भीतर गुटबाजी और असंतोष को बढ़ा दिया है। अगर जल्द ही इस मुद्दे का समाधान नहीं निकाला गया, तो यह आगामी चुनावों से पहले पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

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