खंडवा मेडिकल स्कैंडल: बिना सहमति 'प्राइवेट पार्ट की सर्जरी' करने वाले डॉक्टरों पर जुर्माना, कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला!
मध्यप्रदेश के खंडवा में एक महिला की गोपनीय सर्जरी को लेकर उठे सवाल, जानें पूरा मामला...
ये खबर आपको सोचने पर मजबूर कर देगी की आपको भी डॉक्टर्स प् भरोषा करना चाहिए या नही क्यूंकि यहाँ पर डॉक्टर ने किया ही कुछ ऐसा है जिसके बाद किसी को भी सोचने पर मजबूर कर देगा,भगवान के बाद अगर किसी पर भरोसा होता है तो वो है डॉक्टर लेकिन अगर वही ऐसी शर्मनाक हरकते करें तो फिर किस तरह कोई भरोषा करेगा!
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क्या हुआ था?
महिला के शरीर के 'प्राइवेट पार्ट ' पर हुई सर्जरी में डॉक्टरों ने की लापरवाही!आये दिन ऐसी बहुत सी घटनाये सुनने मिलती है जिनमे से एक ये घटना है जिसे हम लापरवाही ही कहेंगे, मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में मई 2021 का एक चौंकाने वाला मामला अब सामने आया है। एक 25 वर्षीय युवती ने स्थानीय निजी अस्पताल (शुभम हॉस्पिटल) में अपने प्राइवेट पार्ट की सर्जरी करवाई, लेकिन ऑपरेशन के बाद उसे पता चला कि उसकी सहमति के बिना एक पुरुष सर्जन ने यह प्रक्रिया की थी। हैरानी की बात यह है कि सर्जरी के दौरान महिला को यह नहीं बताया गया कि ऑपरेशन करने वाला डॉक्टर पुरुष है।
ऑपरेशन फेल होने पर सामने आई सच्चाई
"पैसे वापस नहीं दिए, तो उठाना पड़ा कानूनी रास्ता..."काफी दिनों बाद जब महिला को उसके प्राइवेट पार्ट में दर्द होने लगा और कुछ असहज सा महसूस करने लगी तब पता चला की सर्जरी के बाद जब महिला को उसके प्राइवेट पार्ट में गांठ बन गई और दर्द बढ़ गया, तो वह दोबारा अस्पताल पहुंची। यहां उसे पता चला कि उसका ऑपरेशन डॉ. रिंकू यादव (पुरुष सर्जन) ने किया था, जबकि महिला का दावा है कि उसने कभी इसकी अनुमति नहीं दी। अस्पताल प्रशासन से जब उसने ऑपरेशन के पैसे वापस मांगे, तो मना कर दिया गया। इसके बाद महिला ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया और 50 हजार रुपए के मुआवजे की मांग की।
कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला
"महिला की सहमति के बिना की गई सर्जरी मेडिकल लापरवाही"पीड़ित महिला की गुहार सुनते हुए खंडवा उपभोक्ता फोरम ने इस मामले में डॉ. शुभांगी मिश्रा (शुभम हॉस्पिटल) और डॉ. रिंकू यादव (सर्जन) को दोषी पाया। कोर्ट ने कहा कि मरीज को ऑपरेशन से पहले सर्जन की जानकारी देना अनिवार्य है। बिना सहमति के पुरुष डॉक्टर द्वारा प्राइवेट सर्जरी करना मेडिकल नियमों का उल्लंघन है।
सजा क्या हुई?
- दोनों डॉक्टरों को 15-15 हजार रुपए का जुर्माना भरने का आदेश।
- 45 दिनों के भीतर राशि पीड़िता को देना अनिवार्य।
- कोर्ट ने डॉक्टरों की लापरवाही को "यौन गरिमा के साथ खिलवाड़" बताया।
क्यों खास है यह केस?
1. महिला सशक्तिकरण vs मेडिकल एथिक्स: यह मामला मरीज के अधिकारों और डॉक्टरों की जवाबदेही पर सवाल उठाता है और ये साफ़ दिखता है की यहाँ जानबूझकर लापरवाही की गई।2. सहमति का अधिकार: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी सर्जरी से पहले मरीज को डॉक्टर के बारे में पूरी जानकारी देना जरूरी है।
3. प्राइवेसी का हनन: महिला का आरोप है कि उसके साथ "शारीरिक छेड़छाड़" हुई, क्योंकि उसे पुरुष सर्जन के बारे में बताया ही नहीं गया और उसके निजी अंग की सर्जरी की गई।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) के नियमों के अनुसार, स्त्री रोग संबंधी ऑपरेशन में अगर पुरुष डॉक्टर शामिल है, तो मरीज की सहमति लेना अनिवार्य है। इस केस में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई, जो कानूनन अपराध है इसलिए ऐसे डॉक्टर को सबक मिलना ही चाहिए।अब क्या होगा आगे?
- पीड़िता के वकील का कहना है कि अगर डॉक्टर जुर्माना नहीं भरते हैं, तो कोर्ट जेल की सजा का आदेश दे सकता है।
- इस मामले ने स्वास्थ्य सेवाओं में महिलाओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा किया है।
निष्कर्ष:
खंडवा का यह मामला साबित करता है कि मेडिकल प्रोफेशन में मरीजों के अधिकारों को गंभीरता से लेना चाहिए। अगर आप या आपके परिवार के साथ ऐसी कोई घटना होती है, तो तुरंत कानूनी मदद लें। और आपके आसपास कोई ऐसा है जिसके साथ ऐसा कुछ हुआ है तो उसे कानून का सहर लेना चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी डोक्टर या अस्पताल ऐसी लापरवाही न करे!
(रिपोर्ट: स्थानीय कोर्ट दस्तावेजों और पीड़िता के बयान पर आधारित)

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