मध्य प्रदेश में कोरोना का विस्फोट: 16 दिन में 47 पॉजिटिव केस, 23 डॉक्टर संक्रमित
ग्वालियर में कोरोना की दस्तक, हर दिन 8-9 नए संदिग्ध मामले
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में कोरोना वायरस के मामले एक बार फिर तेजी से बढ़ रहे हैं। पिछले 16 दिनों में 139 नमूनों की जांच की गई, जिनमें से 47 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए। चिंता की बात यह है कि इनमें 23 डॉक्टर भी शामिल हैं, जो मरीजों का इलाज करते हुए संक्रमित हुए हैं। हर दिन 8 से 9 नए संदिग्ध मामले सामने आ रहे हैं, और जांच में हर तीसरा व्यक्ति पॉजिटिव निकल रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की रणनीति पर सवाल
स्वास्थ्य विभाग इस समय सिर्फ कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग पर ही फोकस कर रहा है। जो लोग पॉजिटिव पाए जाते हैं, उनके संपर्क में आए लोगों की जांच की जा रही है। हालांकि, जांच केवल उन्हीं लोगों की हो रही है जिनमें बुखार, खांसी या सर्दी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। ऐसे में, अगर व्यापक स्तर पर टेस्टिंग हो तो संक्रमितों की संख्या और अधिक हो सकती है।
डॉक्टर्स भी नहीं बच पा रहे, हर दिन 2-3 संक्रमित*
कोरोना की इस नई लहर में स्वास्थ्यकर्मी भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। पिछले 16 दिनों में 23 डॉक्टर कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, जिनमें से अधिकांश मरीजों का इलाज करते हुए संक्रमित हुए। अस्पतालों में PPE किट और सुरक्षा उपकरणों की कमी भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है।
मरीज जांच से क्यों बच रहे?
अस्पतालों में आने वाले मरीजों को डॉक्टर कोरोना टेस्ट कराने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन कई लोग जांच कराने से बच रहे हैं। इसके पीछे सामाजिक कलंक और डर एक बड़ा कारण है। अगर सभी लक्षण वाले मरीजों की जांच हो तो संक्रमण के आंकड़े और भी बढ़ सकते हैं।
जिला अस्पताल में कोरोना टेस्ट किट की कमी
ग्वालियर के जिला अस्पताल में कोरोना टेस्टिंग के लिए पर्याप्त किट्स उपलब्ध नहीं हैं। इस वजह से नमूनों को G.R. मेडिकल कॉलेज (G.R.M.C) भेजा जा रहा है। अस्पताल प्रशासन ने इसकी सूचना भोपाल मुख्यालय को भेजी है और जल्द ही स्थानीय स्तर पर किट खरीदने की योजना बनाई जा रही है।
सोमवार को 14 सैंपल में 4 पॉजिटिव
सोमवार को हुई जांच में 14 सैंपल में से 4 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए। इनमें G.R.M.C का एक डॉक्टर और तीन अन्य निजी लैब में पॉजिटिव आए मरीज शामिल हैं। सभी को आइसोलेशन में रखा गया है।
इस बार कोरोना के लक्षण हल्के, निमोनिया का खतरा कम
अच्छी खबर यह है कि इस बार कोरोना के मरीजों में गंभीर लक्षण नहीं दिख रहे हैं। ज्यादातर मरीज 7 दिन के भीतर ठीक हो रहे हैं और उन्हें ऑक्सीजन या वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ रही। डॉक्टरों के अनुसार, इस बार निमोनिया का खतरा भी कम है।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?
- बुजुर्ग व्यक्ति
- डायबिटीज, हाई बीपी या दिल के मरीज
- जिनमें सर्दी, खांसी और बुखार के लक्षण हों
डॉक्टर अजयपाल सिंह (मेडिसिन विभाग, G.R.M.C) के अनुसार, "हम उन्हीं मरीजों को टेस्ट कराने की सलाह दे रहे हैं जिनमें लक्षण दिखाई दे रहे हैं या जो हाई-रिस्क ग्रुप में आते हैं। अगर ज्यादा लोग टेस्ट कराएं तो पॉजिटिव केस की संख्या बढ़ सकती है।"
निष्कर्ष: सतर्कता ही बचाव है
मध्य प्रदेश में कोरोना के बढ़ते मामले चिंता का विषय हैं, लेकिन अगर लोग मास्क पहनें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं, तो इसके प्रसार को रोका जा सकता है। सरकार और स्वास्थ्य विभाग को भी टेस्टिंग क्षमता बढ़ाने और डॉक्टर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए।
>"सावधानी और जागरूकता ही कोरोना से बचाव का सबसे बड़ा हथियार है।"
यह खबर ग्वालियर से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार की गई है।

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