संस्कारधानी में आपराधिक उन्माद: जबलपुर में बम बनाते, पुलिस पीटते बदमाशों का आतंक

जबलपुर, जिसे संस्कारधानी के नाम से जाना जाता है, पिछले कुछ दिनों में जिस तरह की आपराधिक घटनाओं का गवाह बना है, उसने पूरे शहर में सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक के बाद एक तीन ऐसी वारदातें सामने आई हैं जो न केवल अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस को दिखाती हैं, बल्कि पुलिस व्यवस्था की नाकामी की भी पोल खोलती हैं।

1. घमापुर में खुलेआम बम परीक्षण: 'सूअर मारा बम' बनाने वाले युवकों की तलाश

  •  वारदात: घमापुर थाना क्षेत्र में सोशल मीडिया पर एक चौंकाने वाला वीडियो वायरल हुआ है।
  •  आपराधिक दुस्साहस: वीडियो में कम उम्र के दो युवक स्पष्ट रूप से एक 'सूअर मारा बम' बनाते और उसका खुली जगह पर परीक्षण करते नजर आ रहे हैं। वे एक चट्टान पर बम फेंककर उसकी ताकत का परीक्षण कर रहे थे।
  •  दहशत फैलाने की मंशा: इस वीडियो को जानबूझकर ऑनलाइन पोस्ट करके इन युवकों ने सार्वजनिक रूप से यह संदेश देने की कोशिश की कि उनके पास खतरनाक विस्फोटक हैं और वे किसी को भी निशाना बना सकते हैं।
  •  पुलिस की प्रतिक्रिया: घमापुर थाना प्रभारी संतोष अंधवान ने बताया कि वीडियो को देख लिया गया है और जांच चल रही है। अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए तलाश जारी है। हालांकि, यह सवाल बना हुआ है कि इतना बड़ा काम (बम बनाना और उसका टेस्ट करना) पुलिस की नजरों से कैसे छुपा रहा?

2. मुफ्त शराब न मिलने पर आईएसबीटी के पास दुकान प्रबंधक की निर्मम पिटाई

  •  वारदात: जबलपुर के आईएसबीटी बस स्टैंड के पास स्थित एक शराब दुकान पर हुई इस हिंसा का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है।
  •  आपराधिक दुस्साहस: फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि 8-10 लड़के दुकान में पत्थरबाजी कर रहे हैं। दुकान के कर्मचारी डरकर छिपे हुए हैं। दुकान प्रबंधक दिलीप को इन लड़कों ने बेरहमी से पीटा।
  •  वजह: दुकान कर्मचारियों के अनुसार, ये लड़के मुफ्त में शराब की मांग कर रहे थे। जब उन्हें शराब देने से मना किया गया, तो उन्होंने हिंसा शुरू कर दी।
  •  गंभीर परिणाम: इस हमले में दिलीप को इतनी बुरी तरह पीटा गया कि वह गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है।
  •  पुलिस की प्रतिक्रिया: पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश जारी है। यह घटना आम नागरिकों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगाती है।

3. अधारताल में विवाद: पुलिस को बुलाकर ही थाना टीम पर पथराव

  •  वारदात: जबलपुर के अधारताल इलाके में दो परिवारों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ।
  •  आपराधिक दुस्साहस: विवाद इतना बढ़ा कि एक पक्ष ने दूसरे पर पथराव शुरू कर दिया। मौके पर मौजूद लोगों ने हंड्रेड डायल (100) पर कॉल करके पुलिस को बुलाया।
  •  पुलिस पर हमला: हैरानी की बात यह रही कि जब पुलिस की टीम घटनास्थल पर पहुंची, तो दोनों पक्षों के लोगों ने मिलकर पुलिसकर्मियों पर ही हमला कर दिया और उन पर पथराव किया।
  •  पुलिस की प्रतिक्रिया: इस हमले में एक पुलिसकर्मी घायल हो गया। जबलपुर पुलिस के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि मामला दर्ज किया गया है और अधारताल के दोनों पक्षों के निवासियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। यह घटना सीधे तौर पर पुलिस के प्रभुत्व और प्राधिकार के खिलाफ एक खुली चुनौती थी।

निष्कर्ष: कानून का डर खत्म, पुलिस की विश्वसनीयता संकट में

ये तीनों घटनाएं, जो सिर्फ दो दिनों के भीतर घटीं, जबलपुर में कानून-व्यवस्था की भयावह तस्वीर पेश करती हैं:

1. अपराधियों का बढ़ता दुस्साहस: बम बनाना और उसका वीडियो वायरल करना, मुफ्त शराब की मांग करना और न मिलने पर जानलेवा हमला करना, और पुलिस को बुलाकर उसी पर हमला करना – ये सभी कृत्य अकल्पनीय स्तर के दुस्साहस को दिखाते हैं। अपराधी खुलेआम चुनौती दे रहे हैं।

2. पुलिस की निष्क्रियता/अक्षमता: इन घटनाओं में पुलिस की प्रतिक्रिया सिर्फ "जांच जारी है" और "तलाशी अभियान चल रहा है" तक सीमित है। बम टेस्टिंग जैसा गंभीर अपराध पहले से कैसे पता नहीं चला? शराब दुकान पर हमले के बाद आरोपी अभी तक फरार क्यों हैं? पुलिस पर हुए हमले में त्वरित और कठोर कार्रवाई क्यों नहीं दिख रही? ये सवाल पुलिस की कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल उठाते हैं।

3. जनता का विश्वास डगमगाया: इन घटनाओं से आम नागरिकों में भय का माहौल है। लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या पुलिस उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम है? जब पुलिस स्वयं सुरक्षित नहीं है, तो आम आदमी कैसे सुरक्षित महसूस करे?

4. आइसबर्ग का सिरा: ये वे घटनाएं हैं जिनके सीसीटीवी फुटेज या सबूत सार्वजनिक हुए हैं। पुलिस के पास ऐसे कई और मामलों की शिकायतें हैं जिनका कोई डिजिटल सबूत नहीं है। इसका मतलब यह है कि जमीनी हकीकत शायद और भी भयावह है।

  भविष्य की चुनौती:

जबलपुर को 'संस्कारधानी' का दर्जा हासिल है, लेकिन इन घटनाओं ने इसकी प्रतिष्ठा को धक्का पहुंचाया है। शहर में कानून का भय पूरी तरह समाप्त होता दिख रहा है। पुलिस प्रशासन के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है। सिर्फ प्रतिक्रियात्मक कार्रवाई (जांच, तलाशी) ही काफी नहीं है। जरूरत है:

  •  खुफिया तंत्र मजबूत करने की: बम बनाने जैसी योजनाओं का पता लगाने के लिए।
  •  त्वरित और कठोर कार्रवाई की: गिरफ्तारी और सजा सुनिश्चित करने के लिए, ताकि दूसरों के लिए सबक बने।
  •  दृश्यता और गश्त बढ़ाने की: अपराधियों को यह एहसास दिलाने के लिए कि पुलिस मौजूद है और सतर्क है।
  •  जनता का विश्वास हासिल करने की: त्वरित सहायता और पारदर्शी कार्रवाई के माध्यम से।

जबलपुर की शांति और व्यवस्था बहाल करना अब सिर्फ पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर गंभीर हस्तक्षेप की मांग करता है। वरना, "संस्कारधानी" का खिताब महज एक विडंबना बनकर रह जाएगा। शहर के नागरिक सुरक्षा और न्याय की उम्मीद के साथ त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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