सतना के उप स्वास्थ्य केंद्रों में जगी नई उम्मीद: सालों बाद आई बिजली, मरीजों के चेहरों पर लौटी मुस्कान

सतना। सालों से अंधेरे में डूबे रहने के बाद आखिरकार सतना जिले के कई उप स्वास्थ्य केंद्रों (Sub Health Centers) में रोशनी लौट आई है। बिजली की सुविधा के अभाव में जूझ रहे इन केंद्रों में अब विद्युत आपूर्ति शुरू हो गई है, जिससे न सिर्फ स्वास्थ्यकर्मियों के कामकाज में आसानी होगी, बल्कि इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भी बड़ी राहत मिली है। इन केंद्रों में बिजली कनेक्शन होने से मरीजों के चेहरों पर साफ तौर पर खुशी देखी जा सकती है।

   अंधेरे में सालों तक चला संघर्ष: बिना बिजली के चलते रहे स्वास्थ्य केंद्र

सतना जिले में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के प्रसार के लिए कई उप स्वास्थ्य केंद्र खोले गए। खासतौर पर कोटर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत पिछले लगभग 10 साल में 10 नए उप स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किए गए। हालांकि, एक बुनियादी सुविधा – बिजली – इन केंद्रों से सालों तक कोसों दूर रही। कल्पना कीजिए, एक अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र जहां बिजली न हो। रात के समय आपातकालीन मामलों में अंधेरे में काम करना, वैक्सीन या दवाइयों को उचित तापमान पर न रख पाना, जरूरी उपकरणों का इस्तेमाल न कर पाना – ये सभी चुनौतियां स्वास्थ्यकर्मियों और मरीजों दोनों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थीं।

  •  मरीजों की पीड़ा: बिजली के अभाव में मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। शाम ढलने के बाद या रात में इलाज करवाना मुश्किल हो जाता था। जरूरी जांचों में देरी होती थी। गर्मियों में पंखे न होने से तकलीफ बढ़ जाती थी। साफ-सफाई और पानी की आपूर्ति भी प्रभावित होती थी। यह स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों के लिए निराशाजनक थी।
  •  कर्मचारियों की मुश्किलें: स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भी बिना बिजली के काम करना एक बड़ी चुनौती थी। मेडिकल रिकॉर्ड रखना, दवाइयों का भंडारण, बुनियादी प्रक्रियाएं करना – सब कुछ मुश्किल हो जाता था। इससे सेवा की गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक था।

   जागी व्यवस्था: सीएमएचओ के हस्तक्षेप से बदली तस्वीर

इस गंभीर समस्या पर तब ध्यान गया जब यह मामला जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. एल.के. तिवारी के संज्ञान में आया। मीडिया रिपोर्ट्स और संभवतः स्थानीय स्तर पर उठाई गई आवाजों के माध्यम से इस जरूरी मुद्दे पर प्रकाश डाला गया।

  •  त्वरित कार्रवाई: सीएमएचओ ने तुरंत इस मामले की गंभीरता को समझा और संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जानकारी मांगी। साथ ही, समस्या के निवारण के लिए ठोस कदम उठाए।
  •  विद्युत विभाग से समन्वय: डॉ. तिवारी ने सतना जिले के विद्युत विभाग के अधिकारियों के साथ सीधे संपर्क किया और कोटर क्षेत्र के उप स्वास्थ्य केंद्रों में तत्काल बिजली कनेक्शन प्रदान करने का अनुरोध किया।
  •  अधिकारियों को जिम्मेदारी: यह भी पता चला कि शासन स्तर पर नियुक्त कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (सीएचओ) के पास 'जन आरोग्य खाता' नामक बजट होता है, जिसका उपयोग ऐसी बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के लिए किया जा सकता है। संबंधित सीएचओ को इस दिशा में कार्य करने के लिए निर्देशित किया गया।

   अब जगमगाते हैं केंद्र: बिजली से लौटा जीवन

सीएमएचओ के सक्रिय हस्तक्षेप और विद्युत विभाग के सहयोग से काम तेजी से आगे बढ़ा। आश्चर्यजनक रूप से, महज 15 दिनों के अंदर ही एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल हुई:

  •  7 केंद्रों में आई रोशनी: कोटर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत संचालित 10 उप स्वास्थ्य केंद्रों में से 7 में बिजली कनेक्शन सफलतापूर्वक करा दिए गए हैं। इसका मतलब है कि इन सातों केंद्रों में अब पंखे, लाइट्स, रेफ्रिजरेटर (वैक्सीन भंडारण के लिए), और अन्य जरूरी उपकरण चल सकेंगे।
  •  बिजली-पानी की सुचारू व्यवस्था: सीएमएचओ डॉ. तिवारी ने पुष्टि की कि इन केंद्रों में अब बिजली और पानी की व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित होने लगी है। यह स्थानीय ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में एक बड़ा सुधार है।
  •  भवन निर्माण पर फोकस: शेष 2 उप स्वास्थ्य केंद्र एक अलग समस्या से जूझ रहे थे - वे 'भवन विहीन' थे, यानी उनके पास अपनी खुद की इमारत नहीं थी। इन दोनों केंद्रों के लिए भवन निर्माण की प्रक्रिया को प्राथमिकता के साथ तेज कर दिया गया है। जल्द ही इनके लिए भी उचित भवन बनाए जाएंगे, ताकि वहां भी पूर्ण बुनियादी सुविधाओं के साथ सेवाएं शुरू हो सकें।

   आगे का रास्ता: संपूर्ण जिले की जरूरत पर नजर

सीएमएचओ डॉ. तिवारी ने स्पष्ट किया कि सतना जिले में कुल 195 उप स्वास्थ्य केंद्र हैं। कोटर क्षेत्र की समस्या को हल करना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन यह जिले के अन्य क्षेत्रों में भी ऐसी कमियों की संभावना की ओर इशारा करता है।

  •  सतर्कता की जरूरत: इस सफलता के बाद स्वास्थ्य विभाग के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वह जिले के अन्य सभी उप स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति की समीक्षा करे। कहीं और भी बुनियादी सुविधाओं जैसे बिजली, पानी, भवन या कर्मचारियों की कमी तो नहीं है?
  •  नियमित निगरानी: सुनिश्चित करना होगा कि अब जो सुविधाएं शुरू हुई हैं, वे लगातार बनी रहें और केंद्र प्रभावी ढंग से काम करते रहें। नियमित निरीक्षण और प्रतिक्रिया तंत्र मजबूत करना आवश्यक है।
  •  मरीजों की खुशी सबसे बड़ी उपलब्धि: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन केंद्रों पर आने वाले मरीजों के चेहरों पर जो राहत और खुशी दिखाई दे रही है, वही इस पूरे प्रयास की सबसे बड़ी सफलता है। एक बुनियादी सुविधा का मिलना भी उनके लिए जीवन की गुणवत्ता में बड़ा सुधार लाता है।

 निष्कर्ष:

सतना के कोटर क्षेत्र के उप स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली कनेक्शन का आना सिर्फ तारों और बल्बों की बात नहीं है। यह ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की ओर एक सार्थक कदम है। यह दिखाता है कि जब प्रशासनिक स्तर पर संवेदनशीलता दिखाई जाए और त्वरित कार्रवाई की जाए, तो सालों से चली आ रही समस्याओं का भी समाधान संभव है। सात केंद्रों में आई यह रोशनी सैकड़ों परिवारों के लिए बेहतर स्वास्थ्य और नई उम्मीदों का प्रतीक बन गई है। अब चुनौती यह है कि यह रोशनी न सिर्फ बाकी के केंद्रों तक पहुंचे, बल्कि जिले के हर ग्रामीण को गरिमापूर्ण और सुविधायुक्त स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। मरीजों के खिले हुए चेहरे इस बदलाव की पहली और सबसे सुंदर कड़ी हैं।

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