राजा-सोनम हत्याकांड: हनीमून से हत्या तक की कहानी - देखें पूरी टाइमलाइन
मेघालय के खूबसूरत पहाड़ों में शुरू हुआ एक हनीमून सपना, एक रहस्यमयी गायब होने के बाद, एक क्रूर हत्या और साजिश के आरोपों में बदल गया। राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी का मामला देशभर में सुर्खियों में है। सोनम की गिरफ्तारी ने इस मामले में नया और चौंकाने वाला मोड़ ला दिया है। यहां समझिए कि कब-क्या हुआ:
1. मंगलमय शुरुआत: शादी और हनीमून (11 मई - 20 मई)
- 11 मई 2024: मध्य प्रदेश के इंदौर में राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी की शादी धूमधाम से हुई।
- 20 मई 2024: नवविवाहित जोड़ा अपने हनीमून के लिए खूबसूरत राज्य मेघालय पहुंचा।
2. रहस्यमयी गायब होने की शुरुआत (22 मई - 23 मई)
- 22 मई 2024: दंपति ने चेरापूंजी के प्रसिद्ध रूट ब्रिज का दौरा किया। शाम को वे सोहरा (चेरापूंजी) के नोंग्रियाट गांव में एक होमस्टे में ठहरे।
- 23 मई 2024 (सुबह): जोड़े ने होमस्टे से चेकआउट किया। इसके बाद से उनका किसी को कोई संपर्क नहीं हुआ। वे रहस्यमय तरीके से गायब हो गए।
- 23 मई 2024 (बाद में): उसी दिन बाद में, राजा और सोनम की स्कूटर लावारिस हालत में मेघालय के एक सुनसान इलाके में पाई गई। यह खोज चिंता का सबब बनी।
3. दुखद खोज और जांच का विस्तार (2 जून)
- 2 जून 2024: गायब हुए राजा रघुवंशी का शव मेघालय की राजधानी शिलांग से लगभग 35 किमी दूर, सोहरा के पास एक खाई (घाटी) में मिला। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गला रेतने और सिर पर गंभीर चोटों का जिक्र आया, जिससे हत्या की पुष्टि हुई। सोनम अभी भी लापता थीं, जिससे उनके साथ कुछ गलत होने की आशंका और गहरा गई। कई लोगों को यह भी शक था कि उनकी भी हत्या कर दी गई होगी या उनका तस्करी कर दिया गया होगा।
4. गिरफ्तारियों और सरेंडर का दिन: मामले में नया मोड़ (9 जून)
- 9 जून 2024 (सुबह): लापता सोनम रघुवंशी ने खुद को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। हैरानी की बात यह थी कि वह पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित थीं। उनके साथ किसी प्रकार के शारीरिक उत्पीड़न के कोई निशान नहीं थे।
- 9 जून 2024 (बाद में): इसी दिन, मेघालय पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मध्य प्रदेश के तीन युवकों को गिरफ्तार किया। ये तीनों राजा रघुवंशी की हत्या में शामिल बताए जा रहे हैं। एक चौथा सहयोगी अभी भी फरार है।
- 9 जून 2024 (महत्वपूर्ण मोड़): सोनम की गिरफ्तारी और तीन हमलावरों की पकड़ के बाद, जांच की दिशा पूरी तरह बदल गई। अब पुलिस और जांच एजेंसियों का मुख्य फोकस इस संभावना पर है कि सोनम ने ही अपने पति राजा की हत्या कराने की साजिश रची थी और उसके बाद भागकर उत्तर प्रदेश में छिप गई थी।
5. जांच की मांग और परिवार की प्रतिक्रिया
- मामले की गंभीरता को देखते हुए, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संपर्क कर इसकी जांच सीबीआई को सौंपने का आग्रह किया था। सीएम यादव ने मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा से भी बात की थी और आश्वासन दिया था कि एमपी पुलिस मेघालय पुलिस के साथ पूरा सहयोग कर रही है।
- सोनम के पिता देवी सिंह रघुवंशी ने शुरू से ही दावा किया था कि उनकी बेटी जिंदा है और उसे अपराधियों ने बंधक बना रखा है। उन्होंने मेघालय पुलिस पर जांच में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया था। परिवार जांच में देरी और स्पष्टता की कमी से नाखुश था और लगातार जांच को केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की मांग कर रहा था। हालांकि, सोनम के सुरक्षित होने और हत्या के आरोपी के रूप में उसकी संभावित भूमिका के बाद, उनके पिता के पहले के बयानों पर सवाल उठने लगे हैं।
अब आगे क्या?
- पूछताछ और जांच: सोनम और गिरफ्तार तीनों आरोपियों की गहन पूछताछ चल रही है। पुलिस हत्या का असली मकसद (जैसे दहेज, जीवन बीमा, अन्य रिश्ते, या कोई और कारण), हत्या की योजना कैसे बनी, हथियार क्या थे, और फरार आरोपी की भूमिका क्या थी, जैसे सवालों के जवाब तलाश रही है।
- फरार आरोपी की तलाश: चौथे आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार करना पुलिस की प्राथमिकता है।
- सीबीआई जांच का भविष्य: सोनम की गिरफ्तारी और नए खुलासों के बाद, मध्य प्रदेश सरकार की सीबीआई जांच की मांग का भविष्य अब अनिश्चित है। हालांकि, मामले के अंतरराज्यीय पहलू और गंभीरता को देखते हुए, केंद्र सरकार अभी भी कोई निर्णय ले सकती है।
- आरोपपत्र और मुकदमा: पुलिस जांच पूरी करने के बाद आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र (चार्जशीट) कोर्ट में पेश करेगी। उसके बाद हत्या और आपराधिक साजिश रचने के आरोपों पर मुकदमा चलेगा।
निष्कर्ष:
राजा-सोनम केस ने एक दुखद और जटिल मोड़ ले लिया है। जहां शुरू में राजा की निर्मम हत्या और सोनम के गायब होने से सहानुभूति और चिंता का माहौल था, वहीं अब जांच की किरणें सीधे सोनम और उसके सहयोगियों पर टिक गई हैं। यह केस प्रेम, विश्वासघात, अपराध और जांच की जटिलताओं से भरा एक ऐसा सच है, जिसका अंतिम पटाक्षेप अभी कोर्ट की कार्यवाही पर निर्भर है। पूरी टाइमलाइन बताती है कि कैसे हनीमून का सपना मात्र कुछ दिनों में एक डरावनी त्रासदी में बदल गया।

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