AI-171 और मेडिकल हॉस्टल हादसा: कब तक जिंदगियां लीलती रहेगी सिस्टम की लापरवाही?

  "यह कोई साजिश नहीं..." अमित शाह के बयान के बीच, क्यों डूब रहे हैं देश के भविष्य? 

एक ओर जहां AI-171 विमान हादसे ने देश को हिला कर रख दिया, वहीं एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से आई खबर ने मुल्क के दिल पर एक और गहरा घाव कर दिया। दर्जनों मेडिकल छात्र—जो कल तक कोविड योद्धाओं की तरह देश की सेवा करने का सपना देख रहे थे—आज या तो अस्पताल के बेड पर जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं या फिर हमेशा के लिए अपनी आंखें मूंद चुके हैं। और सरकार? सरकार का कहना है—"यह एक दुर्घटना है, कोई साजिश नहीं।"  

   वह भयावह रात: जब हॉस्टल का कोना-कोना चीख उठा  

रात के करीब 11 बजे का वक्त। कुछ छात्र पढ़ाई में डूबे थे, तो कुछ नींद की गोद में। अचानक एक भीषण धमाका... फिर आग की लपटें... या फिर छत का गिरना (सही कारण अभी भी रहस्य)? जो भी हुआ, उसने पलभर में हॉस्टल को नरक में तब्दील कर दिया।  

  •  "मैंने अपने दोस्त को जलते हुए देखा... वह मेरी आंखों के सामने खाक हो गया,"—एक बचे हुए छात्र का सदमे में दिया बयान।  
  •  "दरवाजा टूट गया था... हम फंस गए थे,"—एक अन्य छात्रा की आंसू भरी आवाज।  

अधिकारी अभी भी मृतकों की गिनती कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि कम से कम 12-15 छात्रों की मौत हो चुकी है।  

   "दुर्घटना है, साजिश नहीं": अमित शाह का बयान और जनता का गुस्सा  

गृह मंत्री अमित शाह ने घटनास्थल का दौरा किया और पीड़ित परिवारों को "पूरा सहयोग" देने का वादा किया। लेकिन जब उन्होंने यह कहा कि "यह एक दुर्घटना है, कोई साजिश नहीं," तो सोशल मीडिया पर तूफान आ गया।  

  •  "अगर इमारत की मरम्मत समय पर हुई होती, तो क्या यह 'दुर्घटना' होती?"—एक ट्विटर यूजर का सवाल।  
  •  "हर बार 'दुर्घटना' कहकर जिम्मेदारों को बचाने की रणनीति!"—एक फेसबुक पोस्ट।  

   AI-171 से लेकर मेडिकल हॉस्टल तक: क्या सिस्टम फेल हो चुका है?  

इस हादसे ने दो बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं:  

1. क्या सरकारी संस्थानों में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ रही हैं? 

  •   मेडिकल हॉस्टल की इमारत पुरानी थी, लेकिन मरम्मत नहीं हुई।  
  •   आपातकालीन निकास द्वार या तो बंद थे या नहीं थे।  

2. क्या हादसों के बाद सिर्फ मुआवजा देकर जिम्मेदारी से बचा जा रहा है?  

  •  AI-171 हादसे में भी विमान के रखरखाव पर सवाल उठे थे।  
  •   हर बार जांच समिति बैठा दी जाती है, लेकिन नतीजा क्या निकलता है?  

   अब क्या? क्या सिर्फ शोक जताने से काम चलेगा? 

  • तत्काल कार्रवाई: सभी सरकारी हॉस्टल्स और अस्पतालों की सुरक्षा ऑडिट हो।  
  • जिम्मेदारी तय करो: नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई।  
  • पारदर्शिता: जांच रिपोर्ट जनता के सामने लाई जाए।  

   निष्कर्ष: अब बहाने नहीं, बदलाव चाहिए!

ये हादसे सिर्फ "दुर्घटनाएं" नहीं हैं—ये सिस्टम की विफलता के सबूत हैं। जब तक जिम्मेदारों को सजा नहीं मिलेगी और सुरक्षा मानकों को गंभीरता से नहीं लिया जाएगा, तब तक ऐसी खबरें आती रहेंगी।  

सवाल यह नहीं कि "अगला हादसा कब?" बल्कि यह कि "क्या हमने अब तक कुछ सीखा?"

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