महाकुंभ की आड़ में करोड़ों की लूट: बरेली रोडवेज का बड़ा घोटाला
बरेली रोडवेज में 500 बसों की मरम्मत और डीजल आपूर्ति में करोड़ों का घोटाला
तीर्थ की आड़ में तिजोरी भरने का खेल
प्रयागराज महाकुंभ जैसे विश्वप्रसिद्ध धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यूपी रोडवेज द्वारा 500 बसें भेजी गईं थीं। लेकिन इन बसों की मरम्मत और डीजल आपूर्ति के नाम पर करोड़ों का भ्रष्टाचार सामने आया है।
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| प्रतीकात्मक चित्र (ai generated image) |
इस पूरे प्रकरण में सेवा प्रबंधक धनजी राम की मुख्य भूमिका सामने आई है, जिन्हें निलंबित कर दिया गया है। बदायूं डिपो के एआरएम अजय सिंह को भी निलंबन झेलना पड़ा है, जबकि बाकी दोषी अधिकारी अब भी कार्रवाई से बचे हैं।
महाकुंभ से पहले ही रच दी गई थी लूट की पटकथा
2023 में जब धनजी राम ने बरेली परिक्षेत्र में सेवा प्रबंधक का पदभार संभाला, तभी से अनियमितताओं की शुरुआत हो गई थी। उन्होंने पहले से काम कर रही "साईं इंटरप्राइजेज" का ठेका निरस्त कर अपने पुराने ठेकेदार (जो गोरखपुर परिक्षेत्र में पहले से संदिग्ध था) को लाकर 29 अगस्त 2023 को मरम्मत का नया ठेका दे दिया।
इसके तुरंत बाद "ममता इंटरप्राइजेज" को आउटसोर्सिंग के तहत मरम्मत का कार्य सौंपा गया। कुछ ही महीनों में "भसीन इंटरप्राइजेज" को पीलीभीत डिपो का ठेका दे दिया गया, जबकि इससे पहले इस फर्म के पास बदायूं डिपो का काम भी था।
नियमों की धज्जियां और अकुशल कारीगरों से मरम्मत
बरेली परिक्षेत्र में नई बीएस-6 श्रेणी की 250 से ज्यादा बसें थीं, जिनकी मरम्मत का जिम्मा संबंधित डीलर या कंपनी को देना नियमानुसार जरूरी था। मगर भ्रष्टाचार की ललक में अधिकारियों ने इन नई बसों की मरम्मत अकुशल और अनुभवहीन कारीगरों से कराई।
नतीजा? बसों की हालत समय से पहले ही बिगड़ने लगी और महाकुंभ जैसे बड़े आयोजन में लगातार ब्रेकडाउन की शिकायतें आती रहीं।
25 लाख खर्च, फिर भी बसें फेल
प्रयागराज महाकुंभ में भेजी गई 500 बसों की मरम्मत पर कुल 25 लाख रुपये खर्च किए गए। लेकिन इसके बावजूद बसों के ब्रेकडाउन और खराबियों की दर्जनों शिकायतें रहीं।
जिस "ममता इंटरप्राइजेज" को गड़बड़ियों के कारण ठेका निरस्त किया गया, उसी से सेवा प्रबंधक धनजी राम ने "पीछे के दरवाजे" से दोबारा काम कराया। आश्चर्य की बात यह रही कि न तो फर्म को ब्लैकलिस्ट किया गया और न ही उन पर कोई वित्तीय दंड लगाया गया, बल्कि उन्हें 50 लाख रुपये का भुगतान तक कर दिया गया।
टेंडर का ड्रामा: लीपापोती की कोशिश
महाकुंभ के बाद जब मामले की परतें खुलने लगीं, तो सेवा प्रबंधक ने खुद को बचाने के लिए मई में दो बार टेंडर जारी किए। पहला टेंडर 22 मई को खुला, जिसमें कोई फर्म आगे नहीं आई। अब दूसरा टेंडर 31 मई को खुलना था। लेकिन इससे पहले ही शासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सेवा प्रबंधक को निलंबित कर दिया।
एक पर गाज, बाकी अब भी बचे
अब तक केवल धनजी राम और बदायूं डिपो के एआरएम अजय सिंह को निलंबित किया गया है। जबकि बरेली डिपो के संजीव श्रीवास्तव, रुहेलखंड डिपो के अरुण कुमार वाजपेयी, और पीलीभीत डिपो के पवन श्रीवास्तव पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
सूत्रों के अनुसार, इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ भी जल्द निलंबन की कार्रवाई हो सकती है। साथ ही, 13 अन्य कर्मचारी भी इस खेल में दोषी पाए गए हैं।
पुराना खेल फिर दोहराया गया
यह पहला मौका नहीं जब रोडवेज विभाग में इस तरह की अनियमितताएं उजागर हुई हों। सितंबर 2023 में भी साईं इंटरप्राइजेज से जुड़ा 20 लाख रुपये का घोटाला सामने आया था। तब सहायक सनी अरोरा और ललित अग्रवाल को निलंबित किया गया था, लेकिन किसी बड़े अधिकारी को नहीं छुआ गया।
डीजल आपूर्ति में भी भारी गड़बड़ी
सिर्फ मरम्मत ही नहीं, डीजल आपूर्ति में भी बड़ा घोटाला सामने आया। पहले गोरखपुर में डीजल घोटाले में चार्जशीट झेल चुके धनजी राम ने बरेली में भी वही खेल दोहराया। महाकुंभ के लिए आवंटित बसों में डीजल की आपूर्ति के नाम पर फर्जी बिल पास कर लाखों की हेराफेरी की गई।
निष्कर्ष: तीर्थ यात्रा के नाम पर तंत्र की चोरी
महाकुंभ जैसी आस्था से जुड़ी व्यवस्था में इस स्तर पर भ्रष्टाचार न सिर्फ एक आर्थिक अपराध है, बल्कि यह जनविश्वास से भी विश्वासघात है। अधिकारियों ने अपनी जेबें भरने के लिए हजारों श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और समय के साथ खिलवाड़ किया।
यह मामला एक उदाहरण है कि कैसे सिस्टम के भीतर बैठे कुछ लोग धर्म, सेवा और जनता के पैसों की कीमत पर निजी स्वार्थ साधते हैं। अब देखने वाली बात यह है कि क्या बाकी दोषियों पर भी कार्रवाई होगी या फिर हमेशा की तरह कुछ नाम दिखावे के लिए बलि चढ़ा दिए जाएंगे।

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