हाईकोर्ट ने सतना कोर्ट के आदेश को पलटा: 3 करोड़ रुपये और 4 किलो सोने की चोरी के मामले में आयकर विभाग की आपत्ति खारिज

  मामले की पृष्ठभूमि  

एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम में, जबलपुर हाईकोर्ट ने सतना कोर्ट के उस आदेश को पलट दिया, जिसमें 3 करोड़ रुपये की नकदी और 4 किलो सोने की चोरी की गई संपत्ति को वापस लौटाने से इनकार किया गया था। यह मामला सतना निवासी श्रवण कुमार पाठक से जुड़ा है, जिन्होंने 2021 में चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी और दावा किया था कि यह नकदी व सोना उनका है। 

प्रतीकात्मक चित्र 

पुलिस द्वारा चोरी की गई संपत्ति बरामद करने के बाद, पाठक ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 457 के तहत अपनी संपत्ति वापस पाने के लिए अर्जी दायर की। लेकिन इस मामले में आयकर विभाग (IT Department) ने हस्तक्षेप किया और नकदी के स्रोत पर सवाल उठाते हुए आपत्ति जताई।  

   आयकर विभाग ने क्यों लगाई रोक?  

  •  आयकर विभाग ने दावा किया कि पाठक ने टैक्स चोरी के लिए इतनी बड़ी रकम और सोना घर में रखा हुआ था।  
  •  विभाग ने कोर्ट से मांग की कि बरामद की गई संपत्ति को उनके हवाले किया जाए ताकि कालाधन (Black Money) की जांच की जा सके।  
  •  इस आधार पर, सतना कोर्ट ने पाठक की अर्जी खारिज कर दी और संपत्ति को वापस देने से इनकार कर दिया।  

   हाईकोर्ट ने क्या कहा?  

हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की एकल पीठ ने सतना कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा:  

1. "आयकर विभाग की आपत्ति के आधार पर ट्रायल कोर्ट अर्जी खारिज नहीं कर सकता।"  

2. "आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 132ए** के तहत, आयकर विभाग किसी आपराधिक मामले में जब्त की गई संपत्ति पर दावा नहीं कर सकता।"  

3. "अगर चोरी की गई संपत्ति का मालिकाना हक साबित हो जाए, तो उसे वापस किया जाना चाहिए।"  

कोर्ट ने यह भी कहा कि पाठक ने अपने स्वामित्व के पुख्ता सबूत पेश किए थे, जिसमें तहसीलदार का प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज शामिल थे। इसलिए, सतना कोर्ट का फैसला कानूनी रूप से सही नहीं था।  

   अब क्या होगा?  

  •  हाईकोर्ट ने संबंधित कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह पाठक की अर्जी पर फिर से सुनवाई करे और उचित फैसला सुनाए।  
  •  अगर पाठक का स्वामित्व साबित होता है, तो उसे 3 करोड़ रुपये और 4 किलो सोना वापस मिल सकता है।  
  •  हालांकि, आयकर विभाग अलग से टैक्स चोरी की जांच जारी रख सकता है।  

   निष्कर्ष  

यह मामला कानून और कर विभाग के बीच टकराव को दर्शाता है। हाईकोर्ट ने साफ किया कि आपराधिक मामलों में जब्त संपत्ति पर आयकर विभाग का तुरंत दावा नहीं हो सकता, बल्कि पहले मालिक को उसकी संपत्ति वापस मिलनी चाहिए। अब देखना होगा कि सतना कोर्ट क्या फैसला सुनाता है।

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