'Saiyara' देखकर लोगों को पैनिक अटैक क्यों आ रहे हैं? एक्सपर्ट से समझें फिल्मों का मेंटल हेल्थ पर प्रभाव

 'Saiyara' देखकर लोगों को पैनिक अटैक क्यों आ रहे हैं? एक्सपर्ट से समझें फिल्मों का मेंटल हेल्थ पर प्रभाव 

मोहित सूरी की नई फिल्म 'Saiyara' अपने इमोशनल स्टोरीलाइन से ज्यादा दर्शकों के इंटेंस रिएक्शन्स की वजह से चर्चा में है। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने शेयर किया कि फिल्म देखते हुए उन्हें पैनिक अटैक, अनकंट्रोल्ड क्राइंग या बेहोशी जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा। क्या ऐसी फिल्में सिर्फ इमोशनल हैं या ये युवाओं की मेंटल हेल्थ के लिए ट्रिगर बन रही हैं? आइए जानते हैं एक्सपर्ट्स की राय। 
Saiyara film review
Saiyara film मेंटल हेल्थ को प्रभावित करती है? 

   क्या 'Saiyara' जैसी फिल्में मेंटल हेल्थ को प्रभावित कर रही हैं?  

'Saiyara' की कहानी एक गायक (कृष, अहान पांडे) और एक गीतकार (वाणी, अनीत पड्डा) के प्यार और सैक्रिफाइस पर आधारित है। फिल्म में ब्रेकअप, अकेलापन और इमोशनल पेन को इतने इंटेंस तरीके से दिखाया गया है कि कई दर्शकों ने इसे "ट्रिगरिंग" बताया। 
  •  भोपाल के एक मल्टीप्लेक्स में 24 साल के राहुल (नाम बदला हुआ) को फिल्म देखते हुए पैनिक अटैक आया, उनकी सांस फूलने लगी और उन्हें हॉस्पिटल ले जाना पड़ा। 
  •  दिल्ली की 21 साल की एक लड़की को फिल्म के आखिरी 15 मिनट में अनकंट्रोल्ड क्राइंग शुरू हो गई, जिसके बाद उसे थिएटर से बाहर निकाला गया। 

सोशल मीडिया पर भी कई यूजर्स ने अपने इमोशनल ब्रेकडाउन के बारे में पोस्ट किए। क्या ये सिर्फ एक फिल्म का असर है या ये मेंटल हेल्थ इश्यूज को उजागर कर रहा है? 

   क्यों हो रहे हैं ऐसे इंटेंस रिएक्शन? एक्सपर्ट्स की राय

1. अनरिजॉल्व्ड ट्रॉमा वाले लोगों पर ज्यादा असर  

डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी (सीनियर साइकियाट्रिस्ट, भोपाल) के अनुसार, जो लोग पहले से एंजाइटी, डिप्रेशन या ब्रेकअप ट्रॉमा से जूझ रहे हैं, उनके लिए ऐसी फिल्में पुराने घावों को फिर से हरा सकती हैं। फिल्म में दिखाया गया इमोशनल पेन उनके लिए रियल-लाइफ ट्रिगर बन जाता है, जिससे पैनिक अटैक या इमोशनल डिसरेगुलेशन हो सकता है। 

2. Emotional Dysregulation क्या है?  

जब कोई व्यक्ति अपनी भावनाओं को कंट्रोल नहीं कर पाता और उसका नर्वस सिस्टम ओवररिएक्ट करता है, तो इसे इमोशनल डिसरेगुलेशन कहते हैं। इसके लक्षण हैं: 
  •  अनकंट्रोल्ड क्राइंग 
  •  सांस फूलना या हार्ट रेट बढ़ना 
  •  बेहोशी या चक्कर आना 
डॉ. अनिल सिंह शेखावत (साइकियाट्रिस्ट) के मुताबिक, 
"कुछ लोगों के लिए फिल्में कैथार्सिस (भावनात्मक शुद्धिकरण) का काम करती हैं, लेकिन जिनकी मेंटल हेल्थ पहले से फ्रैजाइल है, उनके लिए ये ट्रॉमा ट्रिगर कर सकती हैं।"

   क्या फिल्मों के साथ 'Trigger Warning' देना चाहिए?

OTT प्लेटफॉर्म्स जैसे Netflix और Amazon Prime पर अक्सर "Trigger Warning" दिया जाता है, जैसे: 
  •  "This film contains emotional distress, breakup scenes, and intense drama."  
  •  "Viewer discretion advised for those dealing with anxiety or depression."  

लेकिन थिएटर में रिलीज होने वाली फिल्मों के साथ ऐसी कोई चेतावनी नहीं दी जाती। 

   एक्सपर्ट्स क्या सुझाव देते हैं?  

  •  डॉ. चंद्र प्रकाश (मनोविज्ञान विभाग, DU):
 "फिल्म शुरू होने से पहले एक स्लाइड दिखाई जानी चाहिए जो दर्शकों को अलर्ट करे कि यह फिल्म इमोशनली इंटेंस है।"
  •  डॉ. विधि पिलानिया (काउंसलिंग साइकोलॉजिस्ट):  
 "ट्रिगर वॉर्निंग देना सेंसरशिप नहीं, बल्कि मेंटल हेल्थ के प्रति जागरूकता है।"

   क्या करें अगर आप भी इमोशनली सेंसिटिव हैं?

अगर आपको लगता है कि आप एंजाइटी या डिप्रेशन से जूझ रहे हैं, तो: 
 खुद को तैयार करें – अगर फिल्म इमोशनली हेवी है, तो पहले रिव्यू पढ़ लें। 
अकेले न जाएं – किसी क्लोज फ्रेंड या फैमिली मेंबर के साथ वॉच करें। 
 ब्रेक लें – अगर फिल्म देखते हुए अचानक घबराहट हो, तो थिएटर से बाहर आकर शांत होने की कोशिश करें।
 प्रोफेशनल हेल्प लें – अगर ऐसी फिल्में आपको बार-बार डिस्टर्ब करती हैं, तो काउंसलर से बात करें। 

   निष्कर्ष: कला और मेंटल हेल्थ का बैलेंस जरूरी  

फिल्में आर्ट हैं, लेकिन उनका सोशल इम्पैक्ट भी होता है। 'Saiyara' जैसी फिल्में दर्शकों को गहराई से छू रही हैं, लेकिन साथ ही ये मेंटल हेल्थ अवेयरनेस की जरूरत भी उजागर कर रही हैं। शायद फिल्म निर्माताओं को भी अब ट्रिगर वॉर्निंग्स और सेंसिटिव कंटेंट अलर्ट्स पर विचार करना चाहिए। 

क्या आपने 'Saiyara' देखी? कैसा रहा आपका अनुभव? कमेंट में शेयर करें।

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