श्रीराम और खेड़ापति हनुमान मंदिर की 100 करोड़ की जमीन वापस मिली, 18 लोगों के नामांतरण रद्द

श्रीराम और खेड़ापति हनुमान मंदिर की 100 करोड़ की जमीन वापस मिली, 18 लोगों के नामांतरण रद्द  

इंदौर। महालक्ष्मी नगर के पास स्थित श्रीराम और खेड़ापति हनुमान मंदिर की कीमती जमीन, जिसका बाजार मूल्य लगभग 100 करोड़ रुपये आंका गया है, को कलेक्टर ने फिर से सरकारी घोषित कर दिया है। यह जमीन वर्ग विशेष के 18 लोगों के नाम कर दी गई थी, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया था। प्रशासन ने जांच के बाद नामांतरण को रद्द करते हुए जमीन को मंदिर के नाम वापस करने का आदेश जारी किया है।  

Indore mandir land scam
इंदौर मंदिर जमीन मामला 

   मामले की पूरी जानकारी  

 1. क्या है पूरा मामला?  

  •  यह विवाद पीपल्या कुमार की सर्वे नंबर 206 की 2.94 एकड़ जमीन को लेकर है, जहां जमीन की कीमत 7-8 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट है।  
  •  ब्रिटिश काल (1925-26) के मिसल बंदोबस्त रिकॉर्ड में यह जमीन खेड़ापति हनुमान मंदिर के नाम दर्ज थी।  
  •  पुजारी ओंकारदास के बाद गुरु-शिष्य परंपरा के तहत बाबूदास बैरागी का नाम जमीन पर दर्ज हुआ।  

 2. कैसे हुआ नामांतरण? 

  •  1995 में बैरागी को जिला कोर्ट से जमीन पर अधिकार मिला।  
  •  सरकार ने देरी से अपील की, जिसके चलते हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी उसे हार का सामना करना पड़ा।  
  •  2008-09 में तत्कालीन तहसीलदार ने कोर्ट के आदेश के आधार पर जमीन का नामांतरण कर दिया।  
  •  बैरागी ने इस जमीन को वर्ग विशेष के 18 लोगों को बेच दिया। 

 3. कैसे उजागर हुआ घोटाला?  

  •  जब जमीन के नए मालिकों ने उस पर कब्जा करने की कोशिश की, तो स्थानीय लोगों और मंदिर प्रबंधन ने विरोध किया।  
  •  मामला गर्माया तो प्रशासन ने फाइल की जांच की, जिसमें पता चला कि कोर्ट ने पुजारी को जमीन बेचने का अधिकार नहीं दिया था।  
  •  इस आधार पर कलेक्टर ने नामांतरण को रद्द कर दिया और जमीन को सरकारी घोषित कर दिया।  

 4. किन लोगों के नाम थी जमीन? 

जमीन का नामांतरण निम्नलिखित 18 लोगों के नाम किया गया था:  

1. इम्तियाज अब्दुल रज्जाक  

2. सैयद मोईनउद्दीन अहमद  

3. मोहम्मद सलीम रज्जाक  

4. मोहम्मद फारूख  

5. आबेदा मोहम्मद फारूख  

6. अहद फुरकान  

7. रिजवान फारूक  

8. रजिया फारूक  

9. मोहम्मद नईम  

10. आबेदा फारूक  

11. मोहम्मद अशफाक  

12. मोहम्मद सलीम  

13. असलम रज्जाक  

14. अंजुम पति सलीम  

15. अब्दुल रज्जाक  

16. मोहम्मद मुनाफ  

17. नूर मोहम्मद  

18. अब्दुल मजीद  

   अब क्या होगा आगे?  

  •  कलेक्टर के आदेश के बाद प्रशासन ने सोमवार को जमीन का कब्जा ले लिया।  
  •  अब यह जमीन फिर से मंदिर के नाम होगी और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज की जाएगी।  
  •  जांच में शामिल अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।  

  निष्कर्ष

यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और अवैध नामांतरण का उदाहरण है। कलेक्टर के हस्तक्षेप से मंदिर की जमीन बच गई, लेकिन इससे यह सवाल भी उठता है कि कैसे बिना पुख्ता जांच के इतनी कीमती जमीन का हस्तांतरण हो गया। अब सरकार और मंदिर प्रबंधन को जमीन की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।

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