छिंदवाड़ा में फिर हड़कंप: आयुर्वेदिक कफ सिरप पीने से 5 माह की बच्ची की मौत, कई दवाएं जांच में अमानक पाई गईं

छिंदवाड़ा जिले में जहरीली दवाओं का खतरा थमने का नाम नहीं ले रहा है। कोल्ड्रिफ कफ सिरप से 24 बच्चों की मौत के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हुई है। अब बिछुआ इलाके में एक 5 महीने की बच्ची की आयुर्वेदिक कफ सिरप पीने से मौत हो गई। इस घटना ने जिले में एक बार फिर हड़कंप मचा दिया है और दवाओं की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

   आयुर्वेदिक दवा पिलाने के बाद बिगड़ी हालत

जानकारी के मुताबिक, बच्ची को सर्दी-खांसी थी, जिसके बाद परिजनों ने उसे एक आयुर्वेदिक कफ सिरप पिलाया। दवा लेने के कुछ समय बाद ही बच्ची की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने बचा नहीं सके।

इस घटना के सामने आते ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग दोबारा अलर्ट मोड पर आ गया है।

   अमानक आयुर्वेदिक दवाएं मिलीं, प्रशासन में खलबली

घटना के बाद प्रशासन ने इलाके में उपलब्ध आयुर्वेदिक कफ सिरप और अन्य दवाओं के सैंपल जांच के लिए लैब में भेजे। शुरुआती रिपोर्ट में कई दवाएं अमानक (Substandard) पाई गई हैं। इससे साफ है कि जिले में जहरीली और निम्न गुणवत्ता की दवाओं की बिक्री अभी भी जारी है।

  कोल्ड्रिफ सिरप के बाद भी नहीं सुधरा सिस्टम

यह घटना इसलिए और गंभीर मानी जा रही है क्योंकि कुछ ही दिनों पहले कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से 24 बच्चों की मौत हुई थी। उस मामले में सिरप में जहरीले केमिकल DEG/Ethylene Glycol की मिलावट की आशंका जताई गई थी।

उसके बाद जिले में दवाओं की बिक्री पर कड़ी निगरानी और सभी दुकानों की जांच का दावा किया गया था, लेकिन नए केस ने साफ कर दिया कि दवा बाजार में गड़बड़ियां अब भी जारी हैं।

   प्रशासन में फिर मचा हड़कंप

बच्ची की मौत के बाद जिले के स्वास्थ्य अधिकारी, आयुष विभाग और प्रशासन की टीमों ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है:

  • मेडिकल स्टोर्स की जांच
  • संदिग्ध दवाओं को सील करना
  • सैंपल राज्य लैब भेजना
  • डॉक्टर्स और दुकानदारों को चेतावनी जारी

अधिकारियों का कहना है कि जब तक रिपोर्ट पूरी तरह नहीं आ जाती, तब तक किसी भी प्रकार के आयुर्वेदिक कफ सिरप का इस्तेमाल सावधानी से करें।

   माता-पिता के लिए चेतावनी

स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है:

  • बच्चों को कोई भी कफ सिरप बिना डॉक्टर की सलाह के न दें
  • लोकल या बिना ब्रांड वाली दवाओं से बचें
  • दवा की बोतल पर बैच नंबर और एक्सपायरी जरूर चेक करें
  • किसी भी तरह की प्रतिक्रिया दिखने पर तुरंत अस्पताल ले जाएं
   जांच जारी, कड़ी कार्रवाई के संकेत

प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अगर किसी कंपनी की दवा अमानक या नुकसानदायक पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना के बाद एक बार फिर सवाल उठ रहा है कि क्या बाजार में बिक रहीं दवाएं बच्चों के लिए सुरक्षित हैं? और क्या जिले में दवा सप्लाई चेन पर सही निगरानी की जा रही है।

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