यूपीआई सुरक्षा में बड़ा अपडेट: अब पेमेंट के समय दिखेगा बैंक अकाउंट धारक का असली नाम, जानिए पूरा सच

भारत में डिजिटल पेमेंट्स के लोकप्रिय प्लेटफॉर्म यूपीआई (UPI) को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आया है। ये एक बहुत ही अच्छा अपडेट है और सही निर्णय है जो सर्कार ने लिया है इससे बहुत सारी समस्याए जो हमें पेमेंट करते वक्त होती थी वो अब ख़त्म हो जाएगी और सबसे बड़ी बात की अब जब किसी को हम पेमेंट भज रहे होंगे तभी उस धारक का नाम जो उसके बैंक में दर्ज होगा वो हमें दिखेगा जिससे ये कन्फर्म हो जायेगा की हम जिसे पेमेंट भेज रहे है ये वही है या नही।

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नया दिशा-निर्देश जारी किया है। इसके तहत अब यूपीआई के माध्यम से पैसे ट्रांसफर करते समय रिसीवर के बैंक अकाउंट में रजिस्टर्ड नाम स्क्रीन पर दिखाई देगा। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह नियम कैसे काम करेगा और आपके लिए क्या मायने रखता है।    

   क्या है नया नियम? बैंक अकाउंट नाम दिखाना होगा अनिवार्य  

NPCI के ताजा सर्कुलर के अनुसार, अब हर यूपीआई ट्रांजेक्शन के दौरान पेमेंट करने वाले को रिसीवर का वास्तविक बैंक अकाउंट नाम देखने को मिलेगा। यह नाम वही होगा जो बैंक के पास आधिकारिक रूप से रजिस्टर्ड है। पहले यूपीआई आईडी, मोबाइल नंबर, या QR कोड के आधार पर ट्रांजेक्शन होते थे, जिसमें रिसीवर का अकाउंट नाम नहीं दिखता था। अब यह सुविधा गलतियों और धोखाधड़ी को रोकने में मदद करेगी। और अब न कोई पेमेंट गलत होगी और न ही कोई पैसे फसने का चांस रहेगा। 


   कब तक लागू होगा यह बदलाव? 

NPCI ने सभी यूपीआई ऐप्स (जैसे PhonePe, Google Pay, Paytm) को 30 जून 2025 तक इस नियम को लागू करने का निर्देश दिया है। इसका मतलब है कि अगले दो साल में सभी प्लेटफॉर्म अपने सिस्टम को अपडेट कर लेंगे। इसके बाद हर ट्रांजेक्शन में यूज़र्स को रिसीवर का अकाउंट नाम स्पष्ट रूप से दिखेगा। और अगर नाम न दिखे तो पेमेंट न करें। 

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   यूज़र्स को क्या मिलेगा फायदा? 

इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यूज़र्स पेमेंट करने से पहले पुष्टि कर सकेंगे कि पैसा सही व्यक्ति के अकाउंट में जा रहा है। अक्सर QR कोड स्कैन करते समय या कॉन्टेक्ट लिस्ट से नाम चुनने में गलतियां हो जाती थीं। कई बार फ्रॉडर्स नकली यूपीआई आईडी बनाकर पैसे हड़प लेते थे। नए नियम से ऐसी घटनाओं पर रोक लगेगी और डिजिटल पेमेंट्स पर भरोसा बढ़ेगा। 

   यूपीआई सिस्टम में यह बदलाव क्यों जरूरी था?  

UPI ने भारत में डिजिटल लेनदेन को क्रांतिकारी बनाया है, लेकिन सुरक्षा के मामले में कुछ चुनौतियां बनी हुई थीं। जैसे:  

- गलत ट्रांजेक्शन: बिना नाम की जानकारी के यूज़र्स किसी गलत व्यक्ति को पैसे भेज देते थे।  

- फ्रॉड का खतरा: धोखाधड़ी करने वाले फेक आईडी बनाकर पैसे ट्रांसफर करवा लेते थे।  

नए नियम से यूपीआई की कमजोरियों को दूर करते हुए इसे और विश्वसनीय बनाया जाएगा। जिससे आम जन परेशान नही होंगे।


   कैसे काम करता है यूपीआई? नए बदलाव का असर  

यूपीआई सिस्टम बैंकों को आपस में जोड़कर रीयल-टाइम पेमेंट संभव बनाता है। लेकिन अब तक इसकी एक सीमा यह थी कि ट्रांजेक्शन केवल यूपीआई आईडी या मोबाइल नंबर पर आधारित था। नए अपडेट के साथ, बैंक अकाउंट नाम की पुष्टि होने से सिस्टम पूरी तरह पारदर्शी हो जाएगा। इससे न केवल यूज़र्स, बल्कि छोटे व्यापारियों और ऑनलाइन बिजनेस को भी सुरक्षित लेनदेन का लाभ मिलेगा।   


   डिजिटल भुगतान में नई उम्मीद 

NPCI का यह कदम डिजिटल इंडिया के विजन को मजबूती देने वाला है। जैसे-जैसे यूपीआई पर निर्भरता बढ़ रही है, वैसे ही सुरक्षा उपायों को अपग्रेड करना जरूरी हो गया था। इस बदलाव से न केवल यूज़र्स का विश्वास बढ़ेगा, बल्कि भविष्य में डिजिटल पेमेंट्स को और तेजी से बढ़ावा मिलेगा।  


नोट: अगर आप यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं, तो 2025 तक अपने ऐप को नियमित रूप से अपडेट करते रहें ताकि नए फीचर्स का लाभ मिल सके। साथ ही, पेमेंट करते समय रिसीवर का नाम जरूर चेक करें।और अगर नाम नही दिख रहा तो एक बार जिसे आप पेमेंट कर रहे है उनसे जरुर कन्फर्म करें।

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