हापुड़ रेप केस: मदरसे के हाफिज ने 14 साल की बच्ची का दो महीने तक दुष्कर्म किया: हुआ गिरफ्तार
पीड़िता के साथ दो महीने तक दुष्कर्म का सिलसिला
हापुड़ जिले के गढ़मुक्तेश्वर कोतवाली क्षेत्र में एक मदरसे के हाफिज वसीम ने 14 साल की एक नाबालिग लड़की को ब्लैकमेल करके दो महीने तक यौन शोषण किया। आरोपी ने बच्ची को 'मामा' कहकर भरोसे में लेने की कोशिश की और उसके साथ अभद्र वीडियो बनाकर धमकी दी। जब पीड़िता ने उसके बुलाने पर जाने से मना कर दिया, तो उसने वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
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| प्रतीकात्मक चित्र (Ai Generated) |
मामला कैसे हुआ सामने?
पीड़िता के परिवार ने बताया कि हाफिज वसीम बहादुरगढ़ के पलवाड़ा गांव का रहने वाला था और पीड़िता की मां को अपनी बहन बताता था। इसी भरोसे के चलते बच्ची उसके संपर्क में आई। हालांकि, धीरे-धीरे उसने बच्ची को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया और उसका यौन शोषण किया। जब बच्ची ने मदरसे जाना बंद कर दिया, तो आरोपी ने अन्य बच्चों को भेजकर उसे बुलवाया। जब वह नहीं आई, तो उसने उसका निजी वीडियो वायरल कर दिया।
गांव में पहले भी थे आरोपी के खिलाफ आरोप
स्थानीय लोगों ने बताया कि हाफिज वसीम पर पहले भी एक अन्य नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ के आरोप लग चुके थे। हालांकि, उसने चालाकी से खुद को बचा लिया और लड़की को झूठा साबित कर दिया। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि उसके डर के कारण कई लोगों ने मदरसे जाना बंद कर दिया था। दो साल पहले उसे मदरसे से निकाल दिया गया था, लेकिन गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव में उसे वापस बुला लिया गया।
पुलिस ने कार्रवाई कर आरोपी को किया गिरफ्तार
मामला सामने आने के बाद पीड़िता के पिता ने कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। गढ़मुक्तेश्वर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक नीरज कुमार ने बताया कि आरोपी को संबंधित धाराओं में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई अन्य पीड़िता शिकायत करती है, तो उसकी भी जांच की जाएगी।
गांव में मचा हड़कंप, परिवार स्तब्ध
इस घटना ने पूरे गांव को हिलाकर रख दिया है। पीड़िता का परिवार सदमे में है, जबकि ग्रामीण दबी जुबान से इसकी चर्चा कर रहे हैं। कई लोगों ने आरोपी के खिलाफ पहले से मौजूद शिकायतों का जिक्र किया, लेकिन डर के कारण कोई खुलकर सामने नहीं आ रहा।
क्या कहता है कानून?
भारतीय कानून के तहत नाबालिग के साथ यौन शोषण (POCSO Act) और ब्लैकमेलिंग (IT Act) के मामले में सख्त सजा का प्रावधान है। आरोपी पर यौन शोषण, बाल अधिकार उल्लंघन और साइबर अपराध की धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस जांच के दौरान अन्य संभावित पीड़िताओं के बयान भी ले सकती है।
समाज और सिस्टम पर सवाल
यह मामला एक बार फिर समाज और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अगर पहले ही आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई होती, तो शायद यह घटना टाली जा सकती थी। ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव में ऐसे आरोपियों को बचा लिया जाता है, जिससे वे बार-बार ऐसे जघन्य अपराध करते हैं।
निष्कर्ष
हापुड़ का यह मामला न सिर्फ एक आरोपी की क्रूरता, बल्कि सामाजिक लापरवाही और कानूनी प्रक्रिया में ढील का भी उदाहरण है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन अब जरूरत इस बात की है कि ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई हो और पीड़िताओं को न्याय मिले। साथ ही, समाज को भी ऐसे अपराधियों के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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