1052 करोड़ से बना प्रदेश का सबसे बड़ा फ्लाईओवर, अब 45 मिनट की दूरी सिर्फ 6 मिनट में
जबलपुर को मिल रहा है तोहफा! 1052 करोड़ से बना प्रदेश का सबसे बड़ा फ्लाईओवर, अब 45 मिनट की दूरी सिर्फ 6 मिनट में
जबलपुर के लिए 23 अगस्त का दिन ऐतिहासिक बनने वाला है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को यहां राज्य का सबसे बड़ा और अत्याधुनिक फ्लाईओवर जनता को समर्पित करेंगे।
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| Jabalpur-Flyover (फोटो social media) |
यह सिर्फ एक फ्लाईओवर नहीं है, बल्कि जबलपुर को महानगरीय पहचान देने वाला ऐसा प्रोजेक्ट है, जो शहर के ट्रैफिक सिस्टम को पूरी तरह बदल देगा। मदनमहल से दमोह नाका तक फैला यह 6.855 किलोमीटर लंबा और 1052 करोड़ रुपये की लागत से बना फ्लाईओवर शहर की रफ्तार को नई उड़ान देने वाला है।
क्या है खास इस फ्लाईओवर में?
यह फ्लाईओवर न सिर्फ प्रदेश का सबसे बड़ा है, बल्कि इसमें ऐसी इंजीनियरिंग तकनीकें अपनाई गई हैं, जो इसे अनोखा बनाती हैं।
• रेलवे लाइन के ऊपर 192 मीटर लंबा सिंगल स्पान केबल स्टे ब्रिज बनाया गया है, जो प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा आकर्षण है।
• परियोजना में 3 बो-स्ट्रिंग ब्रिज भी शामिल हैं। इनमें से दो पुल रानीताल और एक बलदेवबाग इलाके में है।
• सभी पुल पूरी तरह स्टील से बने हैं और हर पुल की लंबाई करीब 70 मीटर है।
इन्हीं वजहों से यह फ्लाईओवर न सिर्फ जबलपुर बल्कि पूरे देश के लिए आधुनिक इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण बन गया है।
अब 45 मिनट की जगह सिर्फ 6 मिनट
जबलपुर के लोग इस फ्लाईओवर का सबसे बड़ा फायदा ट्रैफिक जाम से राहत के रूप में देखेंगे।
पहले मदनमहल से दमोह नाका तक पहुंचने में 40–45 मिनट लगते थे। लेकिन फ्लाईओवर शुरू होते ही यह सफर सिर्फ 6 से 8 मिनट में पूरा हो सकेगा।
• समय की बचत
• ईंधन की खपत में कमी
• प्रदूषण का स्तर घटेगा
• व्यापार और दैनिक गतिविधियों में तेजी आएगी
यानी यह फ्लाईओवर शहर की रफ्तार के साथ-साथ आम लोगों की लाइफस्टाइल को भी आसान बनाएगा।
सिर्फ सड़क नहीं, पूरा लाइफस्टाइल हब
फ्लाईओवर को बनाते समय सिर्फ ट्रैफिक ही नहीं, बल्कि लोगों की सुविधाओं और पर्यावरण का भी पूरा ध्यान रखा गया है।
• फ्लाईओवर के नीचे 50,000 पौधे लगाए गए हैं, जिससे शहर का हरित आवरण और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी।
• यहां ओपन जिम, बास्केटबॉल कोर्ट और बच्चों के लिए पार्क भी तैयार किए गए हैं।
• यात्रा को आसान बनाने के लिए 10 जगहों पर दिशा सूचक बोर्ड लगाए गए हैं।
यानी यह प्रोजेक्ट सिर्फ गाड़ियों के लिए नहीं, बल्कि समाज और समुदाय को भी जोड़ने का एक नया मॉडल है।
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जबलपुर की पहचान बदलेगी
इतिहास और संस्कृति के लिए पहचाने जाने वाले जबलपुर को अब यह फ्लाईओवर आधुनिकता से भी जोड़ देगा।
• बेहतर कनेक्टिविटी
• पर्यटकों के लिए आसान सफर
• व्यापारिक गतिविधियों को नया आयाम
यह प्रोजेक्ट जबलपुर को एक ऐसे शहर के रूप में पहचान दिलाएगा, जो सांस्कृतिक धरोहर और आधुनिक विकास दोनों का संगम है।
किसने कहा क्या?
स्थानीय सांसद राकेश सिंह और प्रदेश सरकार का कहना है कि यह फ्लाईओवर शहर की तस्वीर बदल देगा। उनका दावा है कि आने वाले समय में यह प्रोजेक्ट न केवल मध्य प्रदेश बल्कि देश के अन्य शहरों के लिए भी रोल मॉडल साबित होगा।
आखिर क्यों है यह खास?
• प्रदेश का सबसे लंबा और सबसे बड़ा फ्लाईओवर
• 1052 करोड़ रुपये की लागत
• 6.855 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर
• 192 मीटर लंबा केबल स्टे ब्रिज
• 3 स्टील बो-स्ट्रिंग ब्रिज
• पर्यावरण और सामुदायिक सुविधाओं पर जोर
नतीजा
23 अगस्त को जब यह फ्लाईओवर आम जनता के लिए खोला जाएगा, तो जबलपुर की पहचान बदल जाएगी। अब लोग ट्रैफिक जाम, धुएं और बेकार समय से निजात पाकर तेज, सुरक्षित और सुगम सफर का अनुभव करेंगे।
यानी यह सिर्फ फ्लाईओवर का उद्घाटन नहीं, बल्कि जबलपुर के लिए नई रफ्तार और नए युग की शुरुआत है। 🚦
👉 तो क्या आप भी तैयार हैं जबलपुर की इस नई पहचान को देखने के लिए?
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