परिवार के तीन सदस्यों को मौत के घाट उतारने वाला 'रावण', अब जेल में गीता-रामायण पढ़ कर मांग रहा मुक्ति!
परिवार के तीन सदस्यों को मौत के घाट उतारने वाला 'रावण', अब जेल में गीता-रामायण पढ़ कर मांग रहा मुक्ति!
गोरखपुर:
कभी परिवार के अपने ही तीन लोगों का कातिल, आज जेल की चारदीवारी के भीतर रामायण और गीता पढ़ते हुए भगवान से माफी मांग रहा है। गोरखपुर जेल में बंद रामदयाल मौर्य की कहानी सुनकर कोई भी सन्न रह जाएगा। जिस इंसान ने अपने दादा-दादी और चचेरे दादा का बेरहमी से कत्ल किया था, अब वही खुद को पापमुक्त करने के लिए पूजा-पाठ और धार्मिक ग्रंथों का सहारा ले रहा है। जेल में बाकी कैदी उसे उसके सनकी स्वभाव और अजीब सोच की वजह से ‘रावण’ कहकर बुलाते हैं।
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हर किसी में दिखता था ‘रावण’
25 साल का रामदयाल मौर्य झंगहा थाना क्षेत्र के मोतीराम अड्डा कोईरान टोला का रहने वाला है। इसी साल 28 फरवरी को उसने फावड़े से अपने दादा कुबेर मौर्य (72), दादी द्रौपदी देवी (70) और दादा के भाई साधु मौर्य (75) की हत्या कर दी। वजह बेहद चौंकाने वाली थी—उसे हर शख्स में ‘रावण’ नजर आता था।
घटना के वक्त वह तीनों के शवों के पास बैठा रहा। दरअसल घर में बंधे भैंस के बच्चे को मारने की कोशिश पर विरोध हुआ, तो उसने खून कर डाला। मां को भी मारने दौड़ा लेकिन वह किसी तरह बच निकली।
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जेल में भी किया हमला, मिला नया नाम
पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा। वहां भी उसकी वही सनक जारी रही। उसे हर किसी में ‘रावण’ दिखता और कई बंदियों पर उसने हमला भी किया। नतीजा यह हुआ कि कैदियों ने ही उसका नाम ‘रावण’ रख दिया। डॉक्टरों की निगरानी में उसका मानसिक इलाज चल रहा है।
अब धीरे-धीरे उसकी सोच बदल रही है। जेल में रहते-रहते उसे घर की याद सताने लगी है। रिहाई की आस में उसने जेल अधीक्षक से रामायण और गीता मांगी, ताकि पाप का प्रायश्चित कर सके।
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गोरखपुर जेल में सिर्फ वही नहीं, कई और खौफनाक किस्से
1. बांसगांव का सिरफिरा
नवंबर 2024 में बांसगांव के भैंसारानी गांव में रंजीत नाम के शख्स ने पड़ोस के डेढ़ साल के मासूम दिव्यांश की सिर कूंचकर हत्या कर दी। वजह? पुलिस को उसने बताया कि बच्चे को हंसता देख उसके अंदर हत्या करने की सनक आ गई।
जेल में रहते हुए डॉक्टर लगातार उसकी जांच कर रहे हैं। उससे मिलने कोई नहीं आता। वह भी दिन-रात गीता-रामायण पढ़ता है और बार-बार डॉक्टरों से अपनी रिहाई के बारे में पूछता है।
चिलुआताल के दहला गांव में 14 दिसंबर 2024 की रात एक खौफनाक वारदात हुई। बड़े भाई बेचन निषाद ने अपने ही भाइयों और परिवार पर थिनर डालकर कमरे में आग लगा दी।
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इस आगजनी में बृजेश निषाद (32), उनकी पत्नी मधु (28), भाई अरविंद (30) और उसकी पत्नी माला (25) की मौत हो गई। तीन साल की बच्ची रिद्धिमा किसी तरह बच गई।
जेल में आने के बाद जब बेचन को पता चला कि चार हत्याओं का आरोप है और जमानत लगभग नामुमकिन है, तो उसने भी पूजा-पाठ शुरू कर दिया। केस का ट्रायल चल रहा है और उसके पिता ही गवाह बने हैं।
3. पिता का कातिल बेटा
पिपराइच के हरखापुर गांव में 26 सितंबर 2024 की रात शराबी बेटे कन्हैया तिवारी ने ईंट से कूंचकर अपने पिता सत्यप्रकाश तिवारी (50) की हत्या कर दी। कहासुनी इतनी बढ़ी कि उसने बेरहमी से वारदात को अंजाम दिया।
जेल में अब वह पछता रहा है। लगातार जमानत की बात करता है लेकिन उसकी पैरवी करने वाला कोई नहीं है। खाली समय में वह गीता-रामायण पढ़कर पश्चाताप करता है।
जेल प्रशासन भी कर रहा मदद
गोरखपुर जेल अधीक्षक दिलीप कुमार पांडेय ने बताया कि जेल की लाइब्रेरी में धार्मिक और सामान्य ज्ञान की कई किताबें रखी गई हैं। इनमें सबसे ज्यादा मांग रामायण और गीता की होती है। बंदियों के कहने पर इन्हें बार-बार मंगाकर बांटा जाता है।
निष्कर्ष
गोरखपुर जेल में ऐसे कई बंदी हैं, जिन्होंने अपराध तो गुस्से और सनक में कर दिया, लेकिन अब भगवान की शरण लेकर खुद को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। सवाल ये है कि क्या पूजा-पाठ और गीता-रामायण पढ़ने से उनका अपराध सच में धुल जाएगा? या ये सिर्फ जेल से बाहर आने की एक नई कोशिश है—ये फैसला शायद वक्त ही करेगा।

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