जबलपुर में घूसकांड: 24 हजार लेते रंगेहाथ पकड़ा गया PHE का इंजीनियर, बाबू पर भी गिरी गाज
जबलपुर में घूसकांड: 24 हजार लेते रंगेहाथ पकड़ा गया PHE का इंजीनियर, बाबू पर भी गिरी गाज
मध्यप्रदेश के जबलपुर से एक बड़ा भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। यहां पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग (PHE) विभाग का कार्यपालन यंत्री (EE) बुधवार, 20 अगस्त को 24 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ाया। यह घूस हैंडपंप मेंटेनेंस का बिल पास करने के नाम पर मांगी जा रही थी। आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो (EOW) की टीम ने पूरे ऑपरेशन को अंजाम देकर आरोपी इंजीनियर और उसके सहयोगी बाबू पर भी कार्रवाई की है।
बिल पास करने के लिए मांगी गई 10% घूस
दमोह जिले के कॉन्ट्रेक्टर रोहित बरौलिया ने सिहोरा ब्लॉक में हैंडपंप मेंटेनेंस का ठेका लिया था। काम पूरा होने के बाद उसने जबलपुर के दमोह नाका स्थित पीएचई मुख्य कार्यालय में करीब 2 लाख 47 हजार रुपए का बिल लगाया।
लेकिन बिल पास कराने के लिए कार्यपालन यंत्री (EE) ने उससे 10% कमीशन यानी 24 हजार रुपए रिश्वत की मांग की। ठेकेदार कई दिनों से कार्यालय के चक्कर काट रहा था, लेकिन बिना पैसा दिए उसका बिल आगे नहीं बढ़ाया जा रहा था।
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शिकायत से फंसा इंजीनियर
कॉन्ट्रेक्टर रोहित बरौलिया ने आखिरकार हिम्मत जुटाई और इस पूरे मामले की लिखित शिकायत जबलपुर EOW के एसपी अनिल विश्वकर्मा से कर दी। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए EOW ने तुरंत जांच शुरू की।
जांच में आरोप सही पाए जाने पर बुधवार दोपहर को टीम ने जाल बिछाया और इंजीनियर को रिश्वत लेते ही धर दबोचा।
बाबू पर भी कार्रवाई
सूत्रों के मुताबिक, यह रिश्वत केवल EE शरद कुमार सिंह ही नहीं बल्कि उसके साथ काम करने वाला क्लर्क (बाबू) विकास पटेल भी मांग रहा था। दोनों ने मिलकर ठेकेदार से पैसों की डिमांड की थी।
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जांच के बाद EOW ने दोनों पर कार्रवाई करते हुए रिश्वतखोरी के आरोप में केस दर्ज किया है। फिलहाल आगे की कानूनी कार्यवाही जारी है।
घूसखोरी के बढ़ते मामले
मध्यप्रदेश में हाल के दिनों में लगातार ऐसे घूसकांड सामने आ रहे हैं। हर बार सरकारी दफ्तरों में बाबू और अधिकारी बिल पास करने, फाइल आगे बढ़ाने या काम पूरा करने के नाम पर रिश्वत मांगते पकड़े जा रहे हैं।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी विभागों में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। सवाल ये उठता है कि जब एक छोटे ठेकेदार को अपना मेहनत से कमाया हुआ पैसा निकालने के लिए रिश्वत देनी पड़ती है, तो आम जनता का काम कैसे होगा?
ठेकेदार की पीड़ा
शिकायतकर्ता रोहित बरौलिया ने बताया कि उसने सिहोरा ब्लॉक के कई इलाकों में हैंडपंप की मरम्मत और देखभाल का काम किया था। लेकिन जब बिल पास कराने की बारी आई, तो अधिकारी और बाबू दोनों ने सीधे-सीधे 24 हजार रुपए की डिमांड रख दी।
“मैं कई बार दफ्तर गया, लेकिन हर बार यही कहा गया कि पैसे दिए बिना काम नहीं होगा। आखिरकार मजबूर होकर मुझे शिकायत करनी पड़ी,” रोहित ने कहा।
EOW की कड़ी निगरानी
EOW की टीम का कहना है कि वे लगातार ऐसे मामलों पर नजर रखे हुए हैं। जैसे ही किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ रिश्वत लेने की पुख्ता जानकारी मिलती है, तुरंत कार्रवाई की जाती है।
पकड़े गए इंजीनियर और बाबू के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया गया है।
निष्कर्ष
जबलपुर का यह मामला सिर्फ एक रिश्वतखोरी की घटना नहीं है, बल्कि यह बताता है कि सिस्टम के भीतर कैसे भ्रष्टाचार जड़ें जमाए हुए है। सरकार चाहे कितनी भी योजनाएं और नियम बना ले, लेकिन जब तक विभागों में बैठे अफसर और कर्मचारी अपनी मानसिकता नहीं बदलते, तब तक ईमानदार ठेकेदारों और आम जनता को ऐसे ही परेशान होना पड़ेगा।
👉 अब बड़ा सवाल ये है कि क्या ऐसी कार्रवाइयों से बाकी भ्रष्ट अफसरों में डर पैदा होगा, या फिर यह घूसखोरी का सिलसिला यूं ही चलता रहेगा।

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